Question:

'संस्कार एवं भावना' एकांकी से हमें क्या शिक्षा प्राप्त होती है? आज के समाज के संदर्भ को ध्यान में रखते हुए अपने विचार लिखिए।

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एकांकी से शिक्षा: जातिगत भेदभाव गलत है, प्रेम व्यवहारिक होना चाहिए। आज भी समाज में ये समस्याएँ हैं। हमें मानवीय मूल्यों को अपनाना होगा और रूढ़ियों से मुक्त होना होगा।
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Solution and Explanation

'संस्कार एवं भावना' एकांकी से प्राप्त शिक्षा: \begin{enumerate जातिगत भेदभाव का विरोध: यह एकांकी हमें सिखाती है कि जाति के नाम पर किया जाने वाला भेदभाव गलत है। इंसान को इंसानियत से देखना चाहिए, जाति से नहीं। प्रेम का व्यवहारिक रूप: केवल प्रेम और ममता की बातें करना पर्याप्त नहीं है, उसे व्यवहार में लाना आवश्यक है। संकीर्ण संस्कारों से मुक्ति: हमें पुरानी रूढ़ियों और संकीर्ण संस्कारों से मुक्त होकर मानवीय मूल्यों को अपनाना चाहिए। समाज के पाखंड पर प्रहार: यह एकांकी समाज के उस पाखंड पर प्रहार करती है जहाँ लोग बातें तो ऊँची करते हैं, लेकिन व्यवहार संकीर्ण होता है। \end{enumerate आज के समाज के संदर्भ में मेरे विचार: आज के समाज में स्थिति पहले से बेहतर जरूर हुई है, लेकिन पूरी तरह नहीं बदली: आज भी कई स्थानों पर जातिगत भेदभाव देखने को मिलता है, खासकर विवाह के मामलों में अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों को आज भी सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है शिक्षित और आधुनिक होने के बावजूद लोग पुराने संस्कारों से मुक्त नहीं हो पाए हैं शहरी क्षेत्रों में स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र आज भी रूढ़ियों से जकड़े हैं आवश्यकता है कि हम अपने संस्कारों का पुनर्मूल्यांकन करें और मानवीय मूल्यों को अपनाएँ शिक्षा का प्रसार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही इन रूढ़ियों से मुक्ति दिला सकता है निष्कर्ष: 'संस्कार एवं भावना' एकांकी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी अपने समय में थी। यह हमें सिखाती है कि हमें अपने संस्कारों को मानवीय मूल्यों के अनुरूप ढालना चाहिए, न कि मानवीय भावनाओं को संकीर्ण संस्कारों के अनुरूप।
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