'पं. प्रताप नारायण मिश्र' लेखक हैं :
Step 1: संदर्भ.
'पं. प्रताप नारायण मिश्र' हिंदी साहित्य के भारतेंदु युग के प्रमुख साहित्यकार थे। वे भारतेंदु हरिश्चंद्र के समकालीन थे और हिंदी निबंध, कविता, व्यंग्य, तथा संपादन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
Step 2: विकल्पों का विश्लेषण.
(A) द्विवेदी युग के: गलत, यह काल मिश्र जी के बाद का है।
(B) भारतेंदु युग के: सही, क्योंकि मिश्र जी इसी युग के प्रसिद्ध लेखक थे।
(C) शुक्ल युग के: गलत, यह काल बहुत बाद का है।
(D) शुक्लोत्तर युग के: गलत।
Step 3: निष्कर्ष.
अतः सही उत्तर है (B) भारतेंदु युग के।
मालवा में ऋतु परिवर्तन के प्रभाव स्वरूप पहले कौन-से बदलाव होते थे ? वर्तमान में उसमें क्या अंतर आया है ? इस अंतर के कारणों की पड़ताल कीजिए ।
ग्रामीण परिवेश में जन्मे, पले-बढ़े व्यक्ति का आगे का जीवन भले ही शहर में बीते पर उसकी स्मृतियों का गाँव सदैव मोहक और आकर्षक बना रहता है । – ‘बिस्कोहर की माटी’ पाठ के आधार पर सोदाहरण लिखिए ।
झोंपड़ी जलने के बाद भी स्वयं पर नियंत्रण रखने वाला सूरदास कब और क्यों बिलख-बिलख कर रोने लगा ? इस घटना के माध्यम से मनुष्य के स्वभाव की किस विशेषता का पता चलता है ?
विकास की अंधी दौड़ का क्या दुष्परिणाम सामने आया ? ऐसी परिस्थिति में बदलाव के क्या उपाय हो सकते हैं ? ‘जहाँ कोई वापसी नहीं’ पाठ के आधार पर लिखिए।
‘गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफात’ पाठ के आधार पर लिखिए कि गांधीजी ने रोगी बालक से कैसा बर्ताव किया । इससे उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता का पता चलता है ?