Question:

‘पहलवान की ढोलक’’ पाठ व्यक्तिगत सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि एकदम नयी व्यवस्था के आरोपित हो जाने का प्रतीक है। सिद्ध कीजिए।

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‘पहलवान की ढोलक’ जैसे प्रतीक यह समझाते हैं कि वास्तविक बदलाव केवल व्यक्ति बदलने से नहीं, सोच और व्यवस्था बदलने से आता है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation


‘पहलवान की ढोलक’ पाठ प्रतीकात्मक भाषा में सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था में परिवर्तन की गहन विवेचना करता है। इसमें पहलवान का पात्र केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि एक व्यवस्था का प्रतिनिधि है जो अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए सांस्कृतिक और लोक-कलाओं का उपयोग करता है।
जब उसकी सत्ता समाप्त होती है, तो एक और पहलवान (नई सत्ता) उसी ढोलक को अपने स्वार्थ के लिए बजाना शुरू करता है। इसका अर्थ है कि केवल व्यक्ति बदला, व्यवस्था वही रही — और उससे जुड़ी शोषण की प्रवृत्ति भी।
ढोलक प्रतीक बन जाती है उस संस्कृति की, जिसका उपयोग सत्ता अपने हितों के लिए करती है। इसलिए यह पाठ सत्ता परिवर्तन की नहीं, बल्कि सत्ता की निरंतरता और लोक-जीवन पर उसके प्रभाव की बात करता है।
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