Question:

फागुन की मनोहारिता मनुष्य के मन पर क्या प्रभाव डालती है? 'अट नहीं रही है' कविता के आधार पर लिखिए। 
 

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प्रकृति पर आधारित कविताओं में, कवि अक्सर प्रकृति के प्रभावों को मानवीय भावनाओं के माध्यम से व्यक्त करते हैं। इन संबंधों को पहचानना उत्तर लिखने में सहायक होता है।
Updated On: Mar 2, 2026
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Solution and Explanation

Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में पूछा गया है कि फागुन के महीने की सुंदरता का मनुष्य के मन पर क्या असर होता है।
Step 2: Detailed Explanation:
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविता 'अट नहीं रही है' में फागुन के सौंदर्य का वर्णन है। इस सौंदर्य का मानव मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है:
  • उल्लास और मस्ती: फागुन की सुंदरता मन में खुशी और उल्लास भर देती है। प्रकृति का कण-कण सौंदर्य से भरा होता है, जिसे देखकर मन भी प्रफुल्लित हो जाता है।
  • कल्पना की उड़ान: कविता की पंक्ति "तुम पर-पर कर देते हो, आँख हटाता हूँ तो हट नहीं रही है" दर्शाती है कि फागुन का सौंदर्य मन को कल्पना के पंख लगाकर उड़ने के लिए प्रेरित करता है।
  • एकाकार होने का भाव: मनुष्य का मन प्रकृति के सौंदर्य से इतना प्रभावित होता है कि वह उससे अपनी आँखें नहीं हटा पाता और उसके साथ एकाकार हो जाना चाहता है।
Step 3: Final Answer:
फागुन की सुंदरता मनुष्य के मन को आनंदित कर उसे कल्पनाशील बना देती है और वह प्रकृति के साथ उड़ान भरने को व्याकुल हो उठता है।
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