प्रकृति की रक्षा : अपनी सुरक्षा
संकेत-बिंदु: • प्रकृति और मनुष्य का संबंध • प्रकृति के साथ खिलवाड़ के उदाहरण • प्रकृति की रक्षा के उपाय
प्रकृति की रक्षा : अपनी सुरक्षा
प्रकृति और मनुष्य का संबंध अटूट है। मनुष्य के जीवन का आधार प्रकृति ही है; हमें भोजन, जल, वायु सबकुछ प्रकृति से ही मिलता है। प्रकृति माँ के समान हमारा पालन-पोषण करती है, परंतु मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए उसी माँ का विनाश कर रहा है। औद्योगिकीकरण और विकास की अंधी दौड़ में हम प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। वनो की अंधाधुंध कटाई, नदियों का प्रदूषण, और वायुमंडल में जहरीली गैसों का उत्सर्जन इसके ज्वलंत उदाहरण हैं। इस खिलवाड़ का दुष्परिणाम हमें बाढ़, सूखा, जलवायु परिवर्तन और नई-नई बीमारियों के रूप में भुगतना पड़ रहा है। यदि हम अपनी सुरक्षा चाहते हैं, तो हमें प्रकृति की रक्षा करनी ही होगी। इसके लिए हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए, जल स्रोतों को स्वच्छ रखना चाहिए और प्रदूषण फैलाने वाले साधनों का उपयोग कम करना चाहिए।
प्रकृति को बचाकर ही हम अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं।
Step 1: Understanding the Question:हमारे बुजुर्ग : हमारा सम्मान
संकेत-बिंदु: • समाज में बुजुर्गों की वर्तमान स्थिति • अनुभवों का खजाना • बुजुर्गों के प्रति कर्तव्य
ढ़ते साइबर अपराध
संकेत-बिंदु: • अर्थ और प्रकार • कारण • रोकथाम के उपाय
'बालगोबिन भगत' पाठ के आधार पर बालगोबिन भगत के स्वरूप पर टिप्पणी लिखिए।
'नौबतखाने में इबादत' पाठ के आधार पर लिखिए कि एक सच्चे कलाकार को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए और किन पर नहीं?
'एक कहानी यह भी' पाठ से उद्धृत कथन 'पिताजी को इस बात का बिलकुल भी अहसास नहीं था कि इन दोनों का तो रास्ता ही टकराहट का है' - में किन 'दो रास्तों' के बीच टकराहट की बात की जा रही है?
'नेताजी का चश्मा' पाठ में हालदार साहब को क्या देखकर 'दुर्दमनीय कौतूहल' हुआ और उन्होंने उसके लिए क्या किया?
आप गगनदीप सिंह/गगनदीप कौर हैं। आपकी माँ कार्यालय के काम से कुछ दिनों के लिए दूसरे शहर गई हैं और उनकी अनुपस्थिति में आपको घर की व्यवस्था सँभालनी पड़ रही है। अपने अनुभव और कठिनाइयों को व्यक्त करते हुए उन्हें 100 शब्दों में पत्र लिखिए।