Question:

'नेताजी का चश्मा' पाठ में हालदार साहब को क्या देखकर 'दुर्दमनीय कौतूहल' हुआ और उन्होंने उसके लिए क्या किया? 
 

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'दुर्दमनीय कौतूहल' का अर्थ है ऐसी जिज्ञासा जिसे दबाया न जा सके। उत्तर में इस भाव को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Updated On: Mar 2, 2026
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Solution and Explanation

Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न के दो भाग हैं: (1) हालदार साहब के तीव्र कौतूहल (जिज्ञासा) का कारण क्या था? (2) उन्होंने अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिए क्या कदम उठाया?
Step 2: Detailed Explanation:
'नेताजी का चश्मा' पाठ के अनुसार, हालदार साहब जब भी कस्बे से गुजरते थे, तो वे देखते थे कि संगमरमर की मूर्ति पर चश्मा असली होता था और वह हर बार बदला हुआ होता था। पत्थर की मूर्ति पर असली और बदलते चश्मे को देखकर उनका कौतूहल बढ़ गया। वे इसे रोक नहीं पाए, इसलिए उन्होंने पान की दुकान पर रुककर पानवाले से इस रहस्य का कारण पूछा।
Step 3: Final Answer:
नेताजी की मूर्ति पर बार-बार बदलते असली चश्मे को देखकर हालदार साहब का कौतूहल बढ़ा और उन्होंने इस बारे में पानवाले से पूछताछ की।
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