हाँ, मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ कि परिवार का एक सिरा किसी समझदार व्यक्ति के हाथ में रहने से परिवार में एकता बनी रहती है।
एकांकी 'सुखी दाली' के सन्दर्भ में तर्क:
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नेतृत्व की आवश्यकता: परिवार में किसी समझदार व्यक्ति का होना आवश्यक है जो सभी निर्णय सोच-समझकर ले। प्रस्तुत एकांकी में पिता (बाबू जी) परिवार के मुखिया हैं, लेकिन उनका निर्णय मकान देने से इनकार करना समझदारी भरा नहीं लगता।
संतुलित निर्णय: समझदार व्यक्ति वह होता है जो पक्ष-विपक्ष को देखते हुए संतुलित निर्णय ले। यहाँ पिता ने बिना चेतन की भावनाओं को समझे सीधा इनकार कर दिया, जिससे परिवार में एकता की जगह दूरियाँ बढ़ीं।
भावनात्मक समझ: परिवार के मुखिया को सदस्यों की भावनाओं को समझना चाहिए। चेतन को मकान की आवश्यकता थी, लेकिन पिता ने उसकी भावनाओं को नहीं समझा।
एकता का अभाव: इस एकांकी में हम देखते हैं कि पिता के अनम्य रवैये के कारण परिवार में एकता का अभाव है। यदि पिता समझदारी दिखाते और चेतन से बातचीत करते, तो शायद समाधान निकल आता।
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निष्कर्ष: परिवार में एकता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि परिवार का मुखिया समझदार, संतुलित और भावनात्मक रूप से परिपक्व हो। वह सभी सदस्यों की बात सुने, उनकी भावनाओं का सम्मान करे और तभी निर्णय ले। 'सुखी दाली' एकांकी में पिता के अनम्य रवैये के कारण परिवार में एकता का अभाव दिखता है।