Question:

निम्नलिखित संस्कृत पद्यांश का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए : 
पद्यांश : 
माता गुरुतरा भूमेः, खात् पितोच्चतरस्तथा। 
मनः शीघ्रतरं वातात्, चिन्ता बहुतरी तृणात्।।

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श्लोकों में तुलना (उपमा) और मूल संदेश दोनों का वर्णन करते हुए भावार्थ देना चाहिए।
Updated On: Oct 28, 2025
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Solution and Explanation

अनुवाद:
माता पृथ्वी से भी अधिक श्रेष्ठ और पूजनीय है, पिता आकाश से भी ऊँचे माने गए हैं। मन हवा से भी अधिक तीव्र गति वाला है, और चिंता घास-तृणों से भी अधिक फैलने वाली है।
भावार्थ:
कवि ने इस श्लोक में माता-पिता के प्रति आदर भाव व्यक्त किया है। माता पृथ्वी की तरह सहनशील और पालन करने वाली होती है, और पिता आकाश की तरह ऊँचे आदर्शों वाले। मनुष्य का मन हवा से भी अधिक तेज़ गति से चलता है और चिंता मनुष्य को हर दिशा में व्यस्त रखती है — जैसे घास जल्दी फैल जाती है।
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