Comprehension

निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित दिए गए तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए : 

सहे वार पर वार अन्त तक, 
लड़ी वीर बाला-सी। 

आहुति-सी गिर चढ़ी चिता पर, 
चमक उठी ज्वाला-सी॥ 

बढ़ जाता है मान वीर का, 
रण में बलि होने से। 

मूल्यवती होती सोने की, 
भस्म यथा सोने से॥

Question: 1

उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।

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संदर्भ लिखते समय रचना का नाम, कवि का नाम और उसका मुख्य भाव — तीनों अवश्य बताएं।
Updated On: Oct 27, 2025
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Solution and Explanation

यह पद्यांश 'झाँसी की रानी' नामक कविता से लिया गया है, जिसके कवि सुभद्राकुमारी चौहान हैं। इस कविता में कवयित्री ने वीरांगना लक्ष्मीबाई के अद्भुत साहस, देशभक्ति और त्याग की भावना का चित्रण किया है।
कविता भारत के स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरक गाथा है, जिसमें रानी लक्ष्मीबाई को एक ऐसी नारी के रूप में दर्शाया गया है जिसने अन्याय और पराधीनता के विरुद्ध डटकर संघर्ष किया।
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Question: 2

रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

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व्याख्या करते समय प्रतीकात्मक शब्दों (जैसे "आहुति", "ज्वाला") का भावार्थ अवश्य स्पष्ट करें।
Updated On: Oct 27, 2025
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Solution and Explanation

रेखांकित अंश — "आहुति-सी गिर पड़ी चिता पर, चमक उठी ज्वाला-सी" — में कवयित्री ने रानी लक्ष्मीबाई के वीरगति प्राप्त करने के दृश्य को अत्यंत भावनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया है।
जब रानी लक्ष्मीबाई ने युद्ध में अपने प्राण त्यागे, तो उनकी देह चिता पर आहुति की तरह समर्पित हो गई। वह ज्वाला के समान प्रज्ज्वलित हो उठीं — जैसे उनका बलिदान पूरे देश के लिए प्रेरणा की ज्योति बन गया हो।
कवयित्री ने रानी के बलिदान को आहुति और ज्वाला के प्रतीक से जोड़ा है, जो त्याग, शौर्य और अमरत्व का प्रतीक हैं। यह अंश रानी के अदम्य साहस और देशप्रेम की अमर गाथा को अमर कर देता है।
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Question: 3

उपर्युक्त पद्यांश में किसकी वीरता का वर्णन किया गया है?

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जब "किसकी वीरता का वर्णन किया गया है" पूछा जाए, तो केवल नाम ही नहीं, उसके गुण और योगदान का भी उल्लेख करें।
Updated On: Oct 27, 2025
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Solution and Explanation

इस पद्यांश में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता का वर्णन किया गया है। उन्होंने अपने देश और सम्मान की रक्षा के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध अदम्य साहस से युद्ध किया।
रानी ने अपने राज्य और राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए प्राणों की आहुति दे दी, परंतु पराधीनता को स्वीकार नहीं किया। कवयित्री ने उन्हें वीरता, त्याग और स्वाभिमान की मूर्ति के रूप में चित्रित किया है।
उनका जीवन भारतीय नारी शक्ति का सर्वोच्च उदाहरण है, जो मृत्यु के बाद भी अमर हो गई।
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