Question:

निम्नलिखित में से किसी एक श्लोक का अर्थ संस्कृत में लिखिए : 
(क) वाच्यं श्रद्धासमेतस्य पृच्छतश्च विशेषतः । 
प्रोक्तं श्रद्धाविहीनस्याप्यरण्यरुदितोपमम् ।। 
(ख) न पाणिपादचपलो, न नेत्रच्चपलोऽनृजुः । 
न स्याद्वाक्वपलश्चैव, न परद्रोहकर्मधीः ।।

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अर्थ करते समय श्लोक के संदेश और उसके सामाजिक या आध्यात्मिक संदर्भ पर ध्यान दें।
Updated On: Nov 19, 2025
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Solution and Explanation

अर्थ प्रक्रिया:
श्लोक (क) का अर्थ:
यह श्लोक हमें श्रद्धा और विश्वास के महत्व को बताता है। इसमें कहा गया है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ किसी वाक्य को स्वीकार करता है, उसका वह वाक्य सशक्त और प्रभावशाली होता है। वहीं, जो व्यक्ति श्रद्धाविहीन होता है, उसके शब्द शून्य होते हैं, जैसे जंगल में अकेले रोने की तरह।
श्लोक (ख) का अर्थ:
यह श्लोक सत्य और धर्म के पालन की महत्ता को बताता है। इसमें कहा गया है कि एक व्यक्ति के हाथ और पैर अगर अनैतिक कार्यों में व्यस्त होते हैं, तो उसकी आत्मा भी पापों में लिप्त होती है। इसके अतिरिक्त, जब कोई व्यक्ति परनिंदा और विश्वासघात करता है, तो वह अपने जीवन में नैतिकता की कमी महसूस करता है।
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