Question:

निम्नलिखित गद्यांशों में से किसी एक गद्यांश का हिन्दी में अनुवाद कीजिए : 
(क) एतामलौकिकी वाचमुपश्रुत्य गोविन्दपादः तमसाधारणं जने मन्वा तस्यै संन्यासदीक्षां ददौ । गुरोः गोविन्दपादादेव वेदान्ततत्वं विधिवदधीत्य स तत्वज्ञो बभूव । सृष्टिरहस्यमधिगम्य गुरोराज्ञया स वैदिक-धमर्मोद्धरणार्थ दिग्विजयाय प्रस्थितः । ग्रामाद प्रामं नगरान्नगरमटन् विद्वद्भिश्च सह शास्त्रचर्चा कुर्वन् स काशीं प्राप्तः ।
(ख) पिता तस्य तद्वृत्त सश्रुत्य खिद्यमानः भूश चुकोप । तदानीमेव नानकस्य भगिनीपतिः जयराम आगतः । तमखिलमुदन्त ज्ञात्वा तं स्वनगर सुलतानपुरमनयत् । तत्रत्यः शासकः नवाबदौलतखाँ युवकनानकस्य व्यवहारकौशलेन शीलेन मधुरया वाचा सन्तुष्टः सन् तं स्वान्नभाण्डागारे नियुक्तवान् ।

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जब भी गद्यांश का अनुवाद करें, तो केवल शब्दों का अनुवाद न करें, बल्कि उनके भाव और सांस्कृतिक संदर्भों को समझकर अनुवाद करें।
Updated On: Nov 19, 2025
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Solution and Explanation

अनुवाद प्रक्रिया
गद्यांश क का अनुवाद:
इस गद्यांश में एक धार्मिक व्यक्ति, गोविन्दपाद, की कहानी है। इसे हिन्दी में अनुवादित करते समय हमें निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए:
1. संस्कृत वाक्य का अर्थ: "एतामलौकिकी वाचमुपश्रुत्य" का अर्थ है "यह लौकिक वाक्य सुनकर"।
2. धार्मिक संदर्भ का अनुवाद: "गोविन्दपादः तमसाधारणं जने मन्वा तस्यै संन्यासदीक्षां ददौ" का अर्थ है "गोविन्दपाद ने सामान्य व्यक्ति को देख कर उसे संन्यास दीक्षा दी"।
3. विधि का पालन: "गुरोः गोविन्दपादादेव वेदान्ततत्वं विधिवदधीत्य स तत्वज्ञो बभूव" का अर्थ है "गोविन्दपाद से वेदान्त के तत्व को विधिपूर्वक अध्ययन कर वह तत्वज्ञानी हो गया"।
4. साधन व साधक की यात्रा: "सृष्टिरहस्यमधिगम्य गुरोराज्ञया स वैदिक-धमर्मोद्धरणार्थ दिग्विजयाय प्रस्थितः" का अनुवाद है "सृष्टि के रहस्यों को जानकर, गुरु की आज्ञा से वह वैदिक धर्म के उद्धारण के लिए यात्रा पर निकला"।
गद्यांश ख का अनुवाद:
गद्यांश ख में नानक की कहानी दी गई है, जिसमें उनके पिता और नानक के व्यवहार के कुछ महत्वपूर्ण प्रसंग हैं:
1. भावनाओं का अनुवाद: "पिता तस्य तद्वृत्त सश्रुत्य खिद्यमानः भूश चुकोप" का अर्थ है "उसकी घटना को सुनकर उसके पिता दुखी हो गए और क्रोधित हो गए"।
2. घटनाक्रम का वर्णन: "तदानीमेव नानकस्य भगिनीपतिः जयराम आगतः" का अनुवाद है "तब नानक की बहन के पति जयराम आये"।
3. व्यक्तित्व के पहलू: "नवाबदौलतखाँ युवकनानकस्य व्यवहारकौशलेन शीलेन मधुरया वाचा सन्तुष्टः सन्" का अर्थ है "नवाब दाऊलतखाँ नानक के व्यवहार, गुण और मधुर वचन से प्रसन्न हुए"।
4. व्यवसायिक कार्य: "स्वान्नभाण्डागारे नियुक्तवान्" का अनुवाद है "उन्हें अपनी रसोई में नियुक्त किया"।
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