Question:

नाटक का वास्तविक अनुकरण उसके ‘दृश्य काव्य’ होने में ही है, कैसे? तीन बिंदुओं में अपने तर्क लिखिए। 
 

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जब नाटक में दृश्य, ध्वनि और अभिनय का संतुलन होता है, तभी वह ‘दृश्य काव्य’ कहलाता है और दर्शकों पर अमिट प्रभाव छोड़ता है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

(1) नाटक दृश्य माध्यम है — इसमें संवाद, अभिनय, संगीत, प्रकाश और रंगमंचीय तकनीकें मिलकर जीवन की घटनाओं को दर्शाते हैं। यह दृश्य अनुभव दर्शक को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है।
(2) 'दृश्य काव्य' की तरह नाटक में भी सौंदर्य, लय, गति और भावनात्मक प्रवाह होता है, जिससे वह सिर्फ पढ़ने की नहीं, देखने की भी कला बन जाती है।
(3) नाटक का उद्देश्य केवल कहानी सुनाना नहीं बल्कि उसका प्रभावशाली मंचन करना है, जहाँ शब्द, भाव और दृश्य सामूहिक रूप से संवेदनाओं को जन्म देते हैं। इसलिए इसे ‘दृश्य काव्य’ कहा जाता है।
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