Comprehension

निम्नलिखित पठित काव्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : 
नाथ संभुधनु भंजनिहारा, होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥ 
आयेसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही॥ 
सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई॥ 
सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा॥ 
सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा॥ 
सुनि मुनिबचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अवमाने॥ 
बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥ 
येहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू॥ 
 

Question: 1

राम ने शिव धनुष तोड़ने वाले को क्या कहा है?

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काव्यांश की पहली कुछ पंक्तियों में अक्सर संवाद की शुरुआत होती है। प्रश्नों के उत्तर के लिए इन पंक्तियों को ध्यान से पढ़ें।
Updated On: Mar 2, 2026
  • शिव का भक्त
  • शिव का दास
  • परशुराम का दास
  • विश्वामित्र का शिष्य
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में पूछा गया है कि श्री राम ने परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए धनुष तोड़ने वाले को क्या बताया।
Step 2: Detailed Explanation:
काव्यांश की पहली पंक्ति देखें:
"नाथ संभुधनु भंजनिहारा, होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥"
यहाँ श्री राम परशुराम से कह रहे हैं, "हे नाथ! शिवजी के धनुष को तोड़ने वाला आपका ही कोई एक दास होगा।" इस प्रकार, राम धनुष तोड़ने वाले को परशुराम का दास बताते हैं।
Step 3: Final Answer:
अतः, राम ने शिव धनुष तोड़ने वाले को परशुराम का दास कहा। विकल्प (C) सही है।
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Question: 2

परशुराम के अनुसार शिव धनुष तोड़ने वाला उनके लिए किसके समान है? इस कथन के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए :
I. शत्रु के समान
II. सहस्रबाहु के समान
III. सेवक के समान

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काव्यांश में पात्रों द्वारा दी गई उपमाओं और तुलनाओं पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि वे उनकी भावनाओं और विचारों को प्रकट करती हैं।
Updated On: Mar 2, 2026
  • केवल I और II सही हैं।
  • केवल II और III सही हैं।
  • केवल I और III सही हैं।
  • I, II और III तीनों सही हैं।
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में पूछा गया है कि परशुराम की दृष्टि में शिव धनुष तोड़ने वाला व्यक्ति किसके समान है।
Step 2: Detailed Explanation:
काव्यांश की पंक्तियों का विश्लेषण करें:
  • "सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई॥" - यहाँ परशुराम कहते हैं कि सेवक सेवा करता है, शत्रुता का काम (अरि करनी) करने वाले से तो लड़ाई ही की जाती है। इसका अर्थ है कि वह व्यक्ति शत्रु के समान है। (कथन I सही है)
  • "सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा॥" - यहाँ वे स्पष्ट रूप से कहते हैं कि जिसने शिव धनुष तोड़ा है, वह सहस्रबाहु के समान मेरा शत्रु (रिपु) है। (कथन II सही है)
  • परशुराम राम द्वारा दी गई 'सेवक' की परिभाषा को अस्वीकार करते हैं। (कथन III गलत है)
अतः, कथन I और II दोनों सही हैं।
Step 3: Final Answer:
परशुराम के अनुसार, धनुष तोड़ने वाला शत्रु और सहस्रबाहु के समान है। अतः, विकल्प (A) सही है।
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Question: 3

निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : परशुराम के अहंकारपूर्ण वचनों को सुनकर लक्ष्मण मुस्कुराने लगे।
कारण : उन्होंने बचपन से ही बहुत से धनुष तोड़े हैं।

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सही व्याख्या वाले प्रश्नों में, 'तात्कालिक कारण' और 'सहायक तर्क' के बीच अंतर को पहचानना महत्वपूर्ण है। लक्ष्मण के मुस्कुराने का तात्कालिक कारण परशुराम का क्रोध था।
Updated On: Mar 2, 2026
  • कथन सही है, किंतु कारण ग़लत है।
  • कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
  • कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की उचित व्याख्या करता है।
  • कथन और कारण दोनों सही हैं, किंतु कारण, कथन की उचित व्याख्या नहीं करता है।
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

Step 1: Understanding the Question:
हमें लक्ष्मण के मुस्कुराने (कथन) और उनके द्वारा बचपन में धनुष तोड़ने (कारण) के बीच संबंध का मूल्यांकन करना है।
Step 2: Detailed Explanation:
  • कथन का मूल्यांकन: काव्यांश में स्पष्ट लिखा है, "सुनि मुनिबचन लखन मुसुकाने।" (मुनि के वचन सुनकर लक्ष्मण मुस्कुराए)। अतः, कथन सही है।
  • कारण का मूल्यांकन: लक्ष्मण आगे कहते हैं, "बहु धनुही तोरी लरिकाईं।" (बचपन में बहुत सी धनुहियाँ तोड़ी हैं)। अतः, कारण भी एक सत्य कथन है जो लक्ष्मण ने कहा।
  • संबंध का मूल्यांकन: लक्ष्मण परशुराम के अहंकारपूर्ण वचनों और एक साधारण धनुष के टूटने पर उनके अत्यधिक क्रोध पर व्यंग्य करते हुए मुस्कुराए। उन्होंने बचपन में धनुष तोड़ने वाली बात अपने व्यंग्य को और तीखा करने के लिए बाद में कही। उनके मुस्कुराने का तात्कालिक कारण परशुराम का बड़बोलापन था, न कि यह याद आना कि उन्होंने बचपन में धनुष तोड़े थे। इसलिए, कारण कथन की सीधी और उचित व्याख्या नहीं करता।
Step 3: Final Answer:
कथन और कारण दोनों अपनी-अपनी जगह सही हैं, लेकिन कारण, कथन का सही स्पष्टीकरण नहीं है। अतः, विकल्प (D) सही है।
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Question: 4

इस काव्यांश के आधार पर लक्ष्मण की वाणी किस प्रकार की थी?

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व्यंग्य का अर्थ है ऐसी बात जो कहने में साधारण लगे पर उसका छिपा हुआ अर्थ ताना मारने वाला या उपहासपूर्ण हो।
Updated On: Mar 2, 2026
  • कटु
  • व्यंग्यपूर्ण
  • गंभीर
  • विनोदप्रिय
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में परशुराम से बात करते समय लक्ष्मण की वाणी की विशेषता पूछी गई है।
Step 2: Detailed Explanation:
लक्ष्मण के संवादों का विश्लेषण करें:
  • "सुनि मुनिबचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अवमाने॥" - वे परशुराम का अपमान करते हुए बोले।
  • "बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥" - वे कहते हैं कि बचपन में हमने ऐसी बहुत सी धनुहियाँ तोड़ीं, तब तो आपने ऐसा क्रोध नहीं किया। यह सीधे तौर पर परशुराम के क्रोध का उपहास है।
  • "येहि धनु पर ममता केहि हेतू।" - इस धनुष पर इतनी ममता क्यों? यह भी एक चुभता हुआ प्रश्न है।
यह सब दिखाता है कि उनकी वाणी सीधी-सीधी कटु या केवल विनोदप्रिय नहीं, बल्कि व्यंग्य से भरी हुई थी, जिसका उद्देश्य उपहास करना और चुभने वाली बात कहना था।
Step 3: Final Answer:
लक्ष्मण की वाणी व्यंग्यपूर्ण थी। अतः, विकल्प (B) सही है।
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Question: 5

परशुराम सभा में मौजूद राजाओं से क्या कह रहे हैं?

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काव्यांश में दी गई चेतावनियों या आदेशों को ध्यान से पढ़ें। 'बिलगाउ' का अर्थ है 'अलग होना', जो सीधे उत्तर की ओर संकेत करता है।
Updated On: Mar 2, 2026
  • शत्रु को उनके सामने उपस्थित कर दें।
  • दोषी स्वयं ही सभा से अलग हो जाए।
  • सभी राजा सभा से अलग हो जाएँ।
  • सभी राजा इसके लिए दोषी हैं।
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में पूछा गया है कि परशुराम ने सभा में उपस्थित राजाओं को क्या चेतावनी दी।
Step 2: Detailed Explanation:
काव्यांश की पंक्ति देखें:
"सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा॥"
इसका अर्थ है: "वह (धनुष तोड़ने वाला) इस राज-समाज से अलग होकर खड़ा हो जाए, नहीं तो (निर्दोष) सभी राजा मारे जाएँगे।"
यहाँ परशुराम स्पष्ट रूप से दोषी व्यक्ति को स्वयं सभा से अलग होने के लिए कह रहे हैं, ताकि बाकी निर्दोष राजाओं को दंड न मिले।
Step 3: Final Answer:
परशुराम राजाओं से कह रहे हैं कि दोषी व्यक्ति स्वयं सभा से अलग हो जाए। अतः, विकल्प (B) सही है।
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