'महाभारत की एक साँझ' शीर्षक अत्यंत सार्थक और औचित्यपूर्ण है। इस शीर्षक की सार्थकता निम्नलिखित बिंदुओं से स्पष्ट होती है:
\begin{enumerate
समय का संकेत: 'साँझ' शब्द संध्या या शाम के समय का संकेत करता है। महाभारत का युद्ध समाप्ति की ओर था और यह वह समय था जब युद्ध की समाप्ति निकट थी।
जीवन की संध्या: यह समय कौरवों के जीवन की संध्या थी। दुर्योधन सहित लगभग सभी कौरव मारे जा चुके थे और अब केवल दुर्योधन शेष था।
अंत का प्रतीक: साँझ दिन के अंत का प्रतीक है। उसी प्रकार यह कृति महाभारत युद्ध के अंतिम क्षणों को दर्शाती है। यह कौरव वंश के अस्त होने का समय था।
दुखद परिणाम: साँझ के बाद अंधकार आता है। यह युद्ध के दुखद परिणाम और अंधकारमय भविष्य का प्रतीक है, जहाँ अनगिनत वीर मारे गए और परिवार नष्ट हो गए।
संधिकाल: यह संधिकाल (संधि का समय) भी था जब युद्ध समाप्त हो रहा था और शांति की संभावनाएँ बन रही थीं, हालाँकि बहुत देर हो चुकी थी।
एक विशेष संध्या: 'एक साँझ' का अर्थ है वह विशेष संध्या जो महाभारत के इतिहास में अमर हो गई - जब दुर्योधन छिपा, पांडवों ने उसे ललकारा और अंतिम युद्ध हुआ।
\end{enumerate
निष्कर्ष: 'महाभारत की एक साँझ' शीर्षक पूर्णतः औचित्यपूर्ण है क्योंकि यह महाभारत युद्ध के अंतिम क्षणों, कौरवों के अस्त होने के समय और उस ऐतिहासिक संध्या का सटीक चित्रण करता है जब महाभारत का महान युद्ध अपने चरम और अंतिम पड़ाव पर था।