केशवदास काव्यधारा के कवि हैं :
Step 1: संदर्भ.
हिंदी साहित्य के रीति काल में कवियों को तीन धाराओं में बाँटा गया है — रीति-बद्ध, रीति-सिद्ध और रीति-मुक्त। केशवदास इस युग के प्रारंभिक कवि हैं।
Step 2: व्याख्या.
केशवदास की रचनाओं में अलंकारों, रसों और काव्यशास्त्र की परंपरा का पालन किया गया है। उन्होंने काव्य को नियमबद्ध और परंपरागत रूप में प्रस्तुत किया, जो रीति-बद्ध कवियों की विशेषता है।
Step 3: निष्कर्ष.
अतः केशवदास को रीति-बद्ध काव्यधारा का कवि माना जाता है।
मालवा में ऋतु परिवर्तन के प्रभाव स्वरूप पहले कौन-से बदलाव होते थे ? वर्तमान में उसमें क्या अंतर आया है ? इस अंतर के कारणों की पड़ताल कीजिए ।
ग्रामीण परिवेश में जन्मे, पले-बढ़े व्यक्ति का आगे का जीवन भले ही शहर में बीते पर उसकी स्मृतियों का गाँव सदैव मोहक और आकर्षक बना रहता है । – ‘बिस्कोहर की माटी’ पाठ के आधार पर सोदाहरण लिखिए ।
झोंपड़ी जलने के बाद भी स्वयं पर नियंत्रण रखने वाला सूरदास कब और क्यों बिलख-बिलख कर रोने लगा ? इस घटना के माध्यम से मनुष्य के स्वभाव की किस विशेषता का पता चलता है ?
विकास की अंधी दौड़ का क्या दुष्परिणाम सामने आया ? ऐसी परिस्थिति में बदलाव के क्या उपाय हो सकते हैं ? ‘जहाँ कोई वापसी नहीं’ पाठ के आधार पर लिखिए।
‘गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफात’ पाठ के आधार पर लिखिए कि गांधीजी ने रोगी बालक से कैसा बर्ताव किया । इससे उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता का पता चलता है ?