'कंकाल' किस विधा की रचना है?
Step 1: कृति की पहचान.
'कंकाल' प्रसिद्ध साहित्यकार जयशंकर प्रसाद की रचना है, जिन्होंने कविता, नाटक तथा गद्य—सभी विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
Step 2: विधागत निर्धारण.
'कंकाल' उपन्यास विधा का ग्रंथ है; यह नाटक/आत्मकथा/रेखाचित्र नहीं है।
Step 3: विकल्प-परीक्षण.
(1) नाटक — गलत; प्रसाद के नाटक 'स्कंदगुप्त', 'ध्रुवस्वामिनी' आदि हैं।
(2) आत्मकथा — गलत; 'कंकाल' आत्मकथात्मक नहीं।
(3) उपन्यास — सही; मान्य विधा यही है।
(4) रेखाचित्र — गलत; यह लघु गद्य-विधा है।
हिंदी के निम्नलिखित उपन्यासों को उनके प्रकाशन वर्ष के अनुसार पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए –
(A) परीक्षा गुरु
(B) गोदान
(C) चंद्रकांता
(D) भाग्य लक्ष्मी
(E) मैला आँचल
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए –
जन्मवर्ष के अनुसार निम्नलिखित रचनाकारों को पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए –
(A) कबीरदास
(B) तुलसीदास
(C) केशवदास
(D) सूरदास
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए –
सूची-I को सूची-II से संबद्ध कीजिए :
| सूची-I (लेखक) | सूची-II (रचना) |
|---|---|
| (A) जयशंकर प्रसाद | (III) कामायनी |
| (B) सुमित्रानंदन पंत | (IV) उच्छवास |
| (C) महादेवी वर्मा | (I) यामा |
| (D) सूर्यकांत त्रिपाठी निराला | (II) राम की शक्ति पूजा |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए :
अलंकार के निम्नलिखित उदाहरणों को अनुप्रास, उपमा, रूपक और सलेश के क्रम में व्यवस्थित कीजिए :
(A) रवि तजु तृण तृण तरु तमाल तरुवर बहु छाए ।
(B) रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरे, मोती, मानुष, चून।।
(C) सिंधु सा विस्रुत और अथाह ।
(D) चरण-कमल बंदौं हरिराय।।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए –
“वीर तुम बढ़े चलो, वीर तुम बढ़े चलो।
सामने पहाड़ हो कि सिंह की गर्जना हो।”
उपयुक्त पंक्तियों में कौन-सा रस है?