दुर्योधन स्वयं को दोषी क्यों नहीं मान रहा था?
दुर्योधन स्वयं को दोषी इसलिए नहीं मान रहा था क्योंकि:
वह अपने आपको कौरव वंश का उत्तराधिकारी मानता था और हस्तिनापुर की गद्दी पर अपना अधिकार समझता था
उसके अनुसार पांडवों को उनका हिस्सा पाने का कोई अधिकार नहीं था
वह द्यूतक्रीड़ा (जुआ) में पांडवों को हराकर उनका राज्य हड़पना उचित समझता था
उसने द्रौपदी का अपमान करना भी उचित समझा क्योंकि वह उसके अनुसार जीती हुई दासी थी
वह अपने किए गए सभी अन्यायों को अपना अधिकार मानता था
दुर्योधन युधिष्ठिर को क्या कह रहा था?
दुर्योधन युधिष्ठिर से कह रहा था कि:
वह धर्म का पुत्र होकर भी जुए में सब कुछ हार गया
वह अपने भाइयों और पत्नी को दांव पर लगाकर धर्म के नाम पर कलंक है
उसे अब धर्म की दुहाई देने का कोई अधिकार नहीं है
वह युद्ध से भागकर अपने कर्तव्य का पालन नहीं कर रहा है
उसे युद्ध में डटकर सामना करना चाहिए
यहाँ दुर्योधन युधिष्ठिर पर व्यंग्य कर रहा था और उसे युद्ध के लिए ललकार रहा था।