दिए गए संस्कृत पद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भ–सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए :
(क) किंचिद् गुरुतरं भूमेः किंचिद् उच्चतरं च खात् ?
किंचिद् शीघ्रतरं वातात् किंचिद् बहुतरं तृणात् ।
माता गुरुतरा भूमेः खात् पितोच्चतरस्तथा ।
मनः शीघ्रतरं वातात् चिन्ता बहुतरी तृणात् ॥
अथवा
(ख) हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जितवा वा भोक्ष्यसे महीम् ।
निराशिर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः ॥
दिए गए पद्यांशों में से किसी एक का संदर्भ सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए।
पद्यांश 1:
ज्यायते ते महाभागा जनसेवा परायणः।
जायतुर्भयं नास्ति येषां कीर्तिः तेषां कवितम्।।
दिए गए पद्यांशों में से किसी एक का संदर्भ सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए।
पद्यांश 2:
न मे रोदन्ति भ्रातरोऽल्पकार्याभिषेचने।
अकृत्वा मुखं पश्च कर्हं कृतं भविष्यति।।
दिये गये पद्यांशों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए :
न मे रोचते भद्रं वः उलूकस्याभिषेचनम् ।
अक्रुद्धस्य मुखं पश्य कथं क्रुद्धो भविष्यति ।।
दिये गये पद्यांशों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए :
जल-बिन्दु-निपातेन क्रमशः पूर्यते घटः ।
सहेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च ।।
नीचे दिए गये पद्यांश का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
पद्यांश
माता गुरुतरा भूमेः ख्यात् पितोच्चतरस्तथा।
मनः शीघ्रतरं वातात् चिन्ता बहुतरी तृणात्॥