Question:

दिए गए संस्कृत गद्यांश का संदर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए।

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संस्कृत गद्यांश का अनुवाद करते समय पहले उसके दार्शनिक या नैतिक भाव को पहचानें, फिर उसे सरल और भावपूर्ण हिन्दी में लिखें।
Updated On: Oct 28, 2025
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Solution and Explanation

यह गद्यांश भारतीय संस्कृति में कर्म और कर्तव्य की भावना पर आधारित है। इसमें 'कर्मवीरों की संस्कृति' का उल्लेख किया गया है, जो मनुष्य को कर्म करते हुए ही जीवन का उद्देश्य प्राप्त करने की प्रेरणा देती है।
1. संदर्भ: इस गद्यांश में 'कर्मयोग' की भारतीय परंपरा का गौरव वर्णित है। यह उपदेश भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांत — "कर्म ही पूजा है" — को स्पष्ट करता है। भारतीय संस्कृति का यही आदर्श है कि मनुष्य अपने कर्तव्यों का पालन निष्ठा और ईमानदारी से करे।
2. भावार्थ: इस गद्यांश में कहा गया है कि हमारी संस्कृति का यह सिद्धांत है — "कर्म करते हुए ही जीवन में सफलता और समृद्धि की प्राप्ति होती है।"
हमें अपने पूर्वजों की कर्मनिष्ठ परंपरा का अनुसरण करना चाहिए। भारतीय संस्कृति में कर्म को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, न कि आलस्य या निष्क्रियता को।
हमारा कर्तव्य है कि हम निरंतर परिश्रम करते रहें और किसी भी स्थिति में आलस्य या अन्य के श्रम के शोषण की प्रवृत्ति न अपनाएँ। यह भी कहा गया है कि यदि हम अपने कर्तव्यों से विमुख होकर केवल फल की चिंता करेंगे, तो हम सच्चे भारतीय संस्कृति के उपासक नहीं कहलाएँगे।
3. निष्कर्ष: भारतीय संस्कृति का सच्चा संदेश है — "कर्म करते रहो और फल की चिंता मत करो।" यही जीवन का मूल सिद्धांत है। कर्म में श्रद्धा, परिश्रम में आनंद और ईमानदारी में निष्ठा ही भारतीय संस्कृति का वास्तविक स्वरूप है।
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