Comprehension

दिए गए पद्यांश पर आधारित तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

ऊधौ मोहिं ब्रज बिसरत नाहीं। 
वृन्दावन गोकुल बन उपवन, सघन कुंज की छाँही। 
प्रात समय माता जसुमति अरु नंद देखि सुख पावत। 
माखन रोटी दधयो सजायौ, अति हित साथ खाववत॥ 
गोपी ग्वाल बाल संग खेलत, सब दिन हँसत सिरात। 
सूरदास धनि-धनि ब्रजवासी, जिनसों हित जडु-तात॥

Question: 1

उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।

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संदर्भ लिखते समय रचना का नाम, कवि का नाम और भाव या प्रसंग अवश्य लिखें, इससे उत्तर पूर्ण बनता है।
Updated On: Oct 27, 2025
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Solution and Explanation

यह पद्यांश भक्त कवि सूरदास के प्रसिद्ध पद 'ऊधौ मोहि ब्रज बिसरत नाहीं' से लिया गया है। इस पद में गोपी कृष्ण-वियोग से व्याकुल होकर ऊधव से कहती हैं कि उन्हें वृंदावन, गोकुल और कृष्ण के बाल्यकाल की स्मृतियाँ विस्मृत नहीं होतीं। गोपियों के हृदय में कृष्ण के प्रति अटूट प्रेम, वात्सल्य और भक्ति की भावना रची-बसी है।
यह पद सूरदास की भक्तिरसपूर्ण रचनाओं का उदाहरण है, जिसमें उन्होंने गोपियों की करुणा, स्नेह और वियोग की पीड़ा को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से चित्रित किया है। इस पद्यांश में ब्रज की पवित्र भूमि, नंद-यशोदा की कोमल भावनाएँ और कृष्ण के बाल्यकाल का मनोरम वातावरण सजीव हो उठता है।
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Question: 2

रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

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व्याख्या में शाब्दिक अर्थ के साथ भावार्थ और निहित भक्ति-भाव अवश्य लिखें। इससे उत्तर गहराई लिए होता है।
Updated On: Oct 27, 2025
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Solution and Explanation

रेखांकित अंश "प्रात समय माता यशुमति अरु नंद देखि सुख पावत" में कवि सूरदास ने बालक कृष्ण के बाल्यकाल का मनोहर दृश्य प्रस्तुत किया है। गोपियाँ कहती हैं कि जब वे प्रातःकाल में यशोदा और नंद को बालक कृष्ण के साथ देखती थीं, तो उन्हें अपार सुख की अनुभूति होती थी।
यशोदा माखन-रोटी सजाकर कृष्ण को खिलाती हैं, नंद उन्हें स्नेहपूर्वक देखता है। इस दृश्य में मातृत्व, पितृत्व और बाल-प्रेम की दिव्य झलक दिखाई देती है।
यह दृश्य केवल गृहस्थ जीवन का चित्रण नहीं है, बल्कि उसमें स्नेह, वात्सल्य और भक्ति का अद्भुत समन्वय है। कवि ने अत्यंत सहज भाषा में ब्रजवासियों के सरल और प्रेमपूर्ण जीवन को उजागर किया है। यह अंश कृष्ण-भक्ति के वात्सल्य रस का सुंदर उदाहरण है।
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Question: 3

उपयुक्त पंक्तियों में किस समय का वर्णन है?

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समय संबंधी प्रश्नों में केवल समय का नाम न लिखें, बल्कि उस समय का वातावरण और भावनाएँ भी व्यक्त करें।
Updated On: Oct 27, 2025
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Solution and Explanation

उपयुक्त पंक्तियों में प्रातःकाल (सुबह के समय) का वर्णन किया गया है। इस समय ब्रज में शांति और आनंद का वातावरण है। गोपियाँ प्रातःकालीन कार्यों में लगी हैं और घर-घर से भक्ति-गीतों की मधुर ध्वनि सुनाई देती है।
यशोदा मैया कृष्ण को माखन-रोटी खिलाती हैं, नंद बाबा उन्हें प्रेमपूर्वक निहारते हैं, और ब्रजवासी इस दृश्य को देखकर आनंदित हो उठते हैं। यह चित्रण सूरदास की कल्पना में ब्रज के सौंदर्य और स्नेहपूर्ण जीवन को सजीव करता है।
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