Question:

भक्तिन द्वारा चौके में खींची गई कोयले की रेखा महादेवी जी के लिए लक्ष्मण के धनुष से खींची हुई रेखा के समान दुर्लंघ्य क्यों हो उठी ?

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ऐसे प्रश्न में प्रतीकात्मक तुलना और लेखक की भावना अवश्य जोड़ें।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

महादेवी वर्मा के इस प्रसंग में भक्तिन ने अपने चौके में शुद्धता बनाए रखने के लिए कोयले से रेखा खींच दी थी ताकि कोई भी उस चौके में प्रवेश न कर सके।
यह रेखा महादेवी जी के लिए लक्ष्मण रेखा के समान इसलिए दुर्लंघ्य हो गई क्योंकि वे अपने सेवकों के विश्वास और परंपरा को ठेस नहीं पहुँचाना चाहती थीं।
भक्तिन की धार्मिक भावना और आस्था से जुड़ी यह रेखा उनकी श्रद्धा और सामाजिक संस्कार का प्रतीक थी।
महादेवी जी ने इसे केवल एक खिची हुई कोयले की रेखा नहीं माना बल्कि इसे आस्था और मर्यादा का प्रतीक मानकर पार नहीं किया। यह उनके संवेदनशील मन और दूसरों की भावना के प्रति आदर को दर्शाता है।
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