अपनी पाठ्य-पुस्तक में से कण्ठस्थ कोई एक श्लोक लिखिए जो इस प्रश्न-पत्र में न आया हो।
नीचे दिया गया श्लोक नैतिकता और सत्कर्म का संदेश देने वाला है। यह हमें जीवन में सत्य, संयम और कर्तव्यपालन की प्रेरणा देता है —
\[ \text{सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।} \\ \text{प्रियं च नानृतं ब्रूयात् एष धर्मः सनातनः।।} \]
भावार्थ: मनुष्य को सदैव सत्य बोलना चाहिए, परंतु ऐसा सत्य नहीं जो कटु हो और दूसरों को दुख पहुँचाए। उसी प्रकार प्रिय वचन बोलना चाहिए, परंतु झूठ बोलकर नहीं। यही सनातन धर्म का नियम है।
यह श्लोक मानव जीवन में वाणी-संयम और सदाचार का सुंदर आदर्श प्रस्तुत करता है। यह सिखाता है कि सत्य और प्रेम दोनों का संतुलन ही वास्तविक धर्म है।
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत। (2 तः 1)
मनुजा वाचनेनैव बोधनं विषयान् बहून्।
दक्षा भवन्ति कार्येषु वाचनेन बहुश्रुताः॥
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत। (2 तः 1)
यथैव सकला नद्यः प्रविशन्ति महोदधिम्।
तथा मानवताधर्मः सर्वे धर्माः समाग्रतः॥
श्लोक का अर्थ संस्कृत में लिखिए : पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम् । मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते ।।
श्लोक का अर्थ संस्कृत में लिखिए : ब्राह्मे मुहूर्ते बुध्येत, धर्मार्थौ चानुचिन्तयेत् । कायक्लेशाँश्च तन्मूलान् वेदतत्वार्थमेव च ।।
श्लोक की हिन्दी में व्याख्या कीजिए : अभिवादनशीलस्य, नित्यं वृद्धोपसेविनः । चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशोबलम् ।।