व्यक्तित्व गुण, प्रकार, अभिप्रेरण, आत्म–धारणा और परिस्थितिजन्य शैलियों का समुच्चय है। जैविक प्रवृत्तियाँ, सीख, संस्कृति और जीवन–अनुभव इसे आकार देते हैं। आकलन के उपकरण—गुण–सूचियाँ (NEO), प्रक्षेपी तकनीकें (TAT, रोर्शाक) और व्यवहारिक अवलोकन। स्वस्थ व्यक्तित्व में स्व–जागरूकता, भाव–नियमन, उद्देश्य और सामाजिक उत्तरदायित्व दिखता है। परिवर्तन सम्भव है—प्रतिबिम्बन, फीडबैक, अभ्यास और थेरेपी से शैलियाँ अधिक अनुकूल बन सकती हैं।