विशेष लेखन की भाषा–शैली सामान्य लेखन से अलग कैसे है ?
विशेष लेखन में विषय की जटिलता, गहराई और वैज्ञानिकता होती है, इसलिए उसकी भाषा-शैली कुछ भिन्न होती है:
(a) विषय के अनुरूप विश्लेषणात्मक एवं सूचनात्मक शैली का प्रयोग होता है।
(b) शब्द चयन सटीक, गंभीर और तकनीकी होता है।
(c) पाठकों को तथ्य और निष्कर्ष दोनों एकसाथ देने की अपेक्षा होती है।
(d) सामान्य लेखन में सरस भाषा का प्रयोग होता है, जबकि विशेष लेखन में तार्किक प्रस्तुति प्रमुख होती है।
‘बाज़ार में कभी–कभी आवश्यकता ही शोषण का रूप धारण कर लेती है।’ — इस कथन को उदाहरण सहित ‘बाज़ार–दर्शन’ पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए।
'यह दंतुरित मुस्कान' कविता में शिशु से मिलकर कवि को कैसी अनुभूति होती है ?
'संगतकार' कविता के माध्यम से कवि ने किस सत्य को उजागर किया है ?
किशोरों में बढ़ती स्क्रीन लत — इस विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
यशोधर बाबू की पत्नी मुख्यतः पुराने संस्कारों वाली थी, फिर किन कारणों से वह आधुनिक बन गई ? उसके इस आचरण पर यशोधर बाबू की क्या प्रतिक्रिया थी ?