'विगत एक-दो दशकों से युवा वर्ग में अपव्यय की प्रवृत्ति बढ़ रही है। भोगवाद की ओर युवक अधिक प्रवृत्त हो रहे हैं। वे सुख-सुविधा की प्रत्येक वस्तु पा लेना चाहते हैं और अपनी आय और व्यय में तालमेल बिठाने की उन्हें चिंता नहीं रहती है। धन-संग्रह न सही, कठिन समय के लिए कुछ बचाकर रखना भी वे नहीं चाहते। लुभावने विज्ञापनों के माध्यम से लुभाकर उत्पादक व्यवसायी उन्हें भरमाते हैं। परिणामस्वरूप आज का युवक मात्र उपभोक्ता बनकर रह गया है। अनेक कम्पनियाँ क्रेडिट कार्ड देकर उनकी खरीद-शक्ति को बढ़ाने का दावा करती है।'
‘बाज़ार में कभी–कभी आवश्यकता ही शोषण का रूप धारण कर लेती है।’ — इस कथन को उदाहरण सहित ‘बाज़ार–दर्शन’ पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए।
'यह दंतुरित मुस्कान' कविता में शिशु से मिलकर कवि को कैसी अनुभूति होती है ?
'संगतकार' कविता के माध्यम से कवि ने किस सत्य को उजागर किया है ?
किशोरों में बढ़ती स्क्रीन लत — इस विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
यशोधर बाबू की पत्नी मुख्यतः पुराने संस्कारों वाली थी, फिर किन कारणों से वह आधुनिक बन गई ? उसके इस आचरण पर यशोधर बाबू की क्या प्रतिक्रिया थी ?