Question:

'विगत एक-दो दशकों से युवा वर्ग में अपव्यय की प्रवृत्ति बढ़ रही है। भोगवाद की ओर युवक अधिक प्रवृत्त हो रहे हैं। वे सुख-सुविधा की प्रत्येक वस्तु पा लेना चाहते हैं और अपनी आय और व्यय में तालमेल बिठाने की उन्हें चिंता नहीं रहती है। धन-संग्रह न सही, कठिन समय के लिए कुछ बचाकर रखना भी वे नहीं चाहते। लुभावने विज्ञापनों के माध्यम से लुभाकर उत्पादक व्यवसायी उन्हें भरमाते हैं। परिणामस्वरूप आज का युवक मात्र उपभोक्ता बनकर रह गया है। अनेक कम्पनियाँ क्रेडिट कार्ड देकर उनकी खरीद-शक्ति को बढ़ाने का दावा करती है।'

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आधुनिक उपभोक्तावाद से बचने के लिए युवाओं को अपने वित्तीय फैसलों में विवेकपूर्ण सोच और बचत की आदत डालनी चाहिए।
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Solution and Explanation

यह पंक्तियाँ आज के युवा वर्ग के भोगवादी दृष्टिकोण और उनकी उपभोक्ता मानसिकता पर प्रकाश डालती हैं। आधुनिक समय में विज्ञापनों और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से युवाओं को लुभाया जाता है, जिससे उनका ध्यान अपने वित्तीय लक्ष्यों पर नहीं रहता। परिणामस्वरूप, वे भविष्य के लिए कोई बचत नहीं करते, बल्कि तत्काल संतुष्टि की ओर बढ़ते हैं। आज का युवा त्वरित लाभ और भौतिक सुखों की ओर अधिक आकर्षित होता है, जो उसे लंबी अवधि की योजनाओं से दूर कर देता है। विज्ञापन उद्योग और वित्तीय संस्थान इसे भुनाने में लगे रहते हैं, जिससे युवा अपने सीमित संसाधनों का अधिकतम उपयोग नहीं कर पाते। इस मानसिकता के कारण न केवल आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है, बल्कि व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए, यह पंक्तियाँ युवाओं को सचेत करती हैं कि वे अपने वित्तीय व्यवहार में समझदारी और संयम अपनाएं, ताकि वे स्थिर और सुरक्षित भविष्य की ओर अग्रसर हो सकें। इस प्रकार, यह संदेश हमें बचत और सोच-समझकर खर्च करने के महत्व को समझाता है, जो सफल और संतुलित जीवन के लिए आवश्यक है।
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