तिरिछ एक जंगली जानवर है, जिसे कहानी में समाज की शोषण और क्रूरता का प्रतीक माना जा सकता है। यह उस व्यक्ति या शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है जो समाज में डर, हिंसा और अन्याय फैलाती है।
तिरिछ की हिंसक प्रवृत्तियाँ और उसके शिकारी स्वभाव को अगर हम समाज में प्रचलित अत्याचारों से जोड़कर देखें, तो यह दिखाता है कि समाज में कुछ ताकतें ऐसी होती हैं जो कमजोरों का शिकार करती हैं और उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार नियंत्रित करने की कोशिश करती हैं। तिरिछ का स्वभाव उन शोषणकारी शक्तियों का प्रतीक है, जो अपनी सत्ता और प्रभाव बनाए रखने के लिए भय और हिंसा का सहारा लेती हैं।
कहानी में तिरिछ का स्थान विशेष रूप से उन व्यक्तियों या संस्थाओं के प्रतीक के रूप में उभरता है, जो समाज के कमजोर वर्गों, जैसे कि निर्धन, शोषित या दलित लोगों के खिलाफ क्रूरता अपनाते हैं। यह एक ऐसा रूप है, जो दिखाता है कि समाज में किसी वर्ग के खिलाफ अन्याय और अत्याचार किस तरह से किया जाता है।
इस प्रकार, तिरिछ केवल एक जंगली जानवर नहीं है, बल्कि यह उन समाजिक और राजनीतिक ताकतों का प्रतिनिधित्व करता है, जो अपनी स्थिति और सत्ता को बनाए रखने के लिए दूसरों का शोषण करती हैं और उन्हें भयभीत करती हैं। यह समाज में समता और न्याय की आवश्यकता को भी दर्शाता है, जहाँ हर व्यक्ति को समान अधिकार और सम्मान मिल सके।