'सिपाही की माँ' कहानी में मुन्नी वह पात्र है, जो अपने बेटे के लिए बहुत समर्पित और संघर्षशील होती है। उसकी माँ की भूमिका में उसके आंतरिक संघर्ष और बलिदान की छवि चित्रित की जाती है। मुन्नी एक सामान्य ग्रामीण महिला है, परंतु जब देश की रक्षा के लिए उसका बेटा सिपाही बनकर युद्ध क्षेत्र में जाता है, तब उसमें असाधारण धैर्य और साहस देखने को मिलता है।
मुन्नी के भीतर एक ओर माँ का वात्सल्य है, तो दूसरी ओर देशभक्ति की भावना भी है। वह अपने बेटे की चिंता से व्याकुल रहती है, परंतु जब देश और बेटे के कर्तव्य के बीच चुनाव करना होता है, तो वह देश को प्राथमिकता देती है। उसका यह निर्णय उसके चरित्र की गहराई और मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है।
कहानी में मुन्नी का पात्र नारी शक्ति, त्याग और मातृत्व के उच्च आदर्शों का प्रतीक है। वह न केवल अपने पुत्र के लिए चिंतित रहती है, बल्कि पूरे देश के सैनिकों को अपना बेटा मानती है। जब उसे यह समाचार मिलता है कि उसका बेटा शहीद हो गया है, तो वह टूटती नहीं, बल्कि गर्व से कहती है कि उसका बेटा देश के लिए मरा है।
मुन्नी का यह चरित्र हमें यह सिखाता है कि सच्चा त्याग क्या होता है और एक माँ अपने बच्चे के साथ-साथ देश के लिए भी कितनी भावनात्मक और मानसिक दृढ़ता रख सकती है। यह कहानी भारतीय नारी के भीतर छिपी अपार शक्ति और आदर्शों को उजागर करती है, जो परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य और मूल्यों से नहीं डगमगाती।