Question:

पंचपरमेश्वर" के खो जाने को लेकर कवि चिंतित क्यों है?

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समाज में आदर्शों की कमी से नैतिक संकट उत्पन्न हो सकता है, इसलिए कवि का यह चिंतित होना स्वाभाविक है।
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Solution and Explanation

कवि चिंतित है क्योंकि "पंचपरमेश्वर" का खो जाना केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि समाज में न्याय, सत्य और अच्छाई के आदर्श का खो जाना है। "पंचपरमेश्वर" वह आदर्श था जो समाज में नैतिकता, समानता और न्याय की प्रतीक था। जब इस प्रकार के आदर्शों का ह्रास होता है, तो इससे समाज में उथल-पुथल और भ्रामक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। कवि को यह डर है कि "पंचपरमेश्वर" जैसे आदर्श का खो जाना समाज में नैतिक मूल्यों की कमी को जन्म दे सकता है। ऐसे में न केवल समाज में न्याय का अभाव हो सकता है, बल्कि व्यक्तियों के बीच द्वेष और शोषण भी बढ़ सकता है। "पंचपरमेश्वर" का अस्तित्व इस बात का प्रतीक था कि समाज में सच्चाई और ईमानदारी का सम्मान किया जाता था, और सभी लोग एक समान मानवीय अधिकारों से संपन्न थे। कवि यह भी मानते हैं कि इस आदर्श के नष्ट हो जाने से समाज में एक प्रकार की अव्यवस्था और अराजकता फैल सकती है, जहाँ सत्य और न्याय का कोई स्थान नहीं रहेगा। उनका यह भय इस तथ्य को उजागर करता है कि समाज के आदर्शों और नैतिक मूल्यों के कमजोर होने से केवल सामाजिक संरचना ही नहीं, बल्कि मानवता के बुनियादी सिद्धांत भी प्रभावित हो सकते हैं।
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