निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :
हरगोबिन ने कुछ नहीं खाया। खाया नहीं गया। संवइद्या टकर खाता है और ‘अफर’ कर सोता है, किंतु हरगोबिन को नींद नहीं आ रही है। यह उसने क्या किया? क्या कर दिया? वह किसलिए आया था? वह झूठ क्यों बोला? नहीं, नहीं सुबह उठते ही वह बूढ़ी माता को बड़ी बहुरिया का सही संवाद सुना देगा — अक्षर-अक्षर, ‘मायजी, आपकी इकलौती बेटी बहुत दुख में है। आज ही किसी को भेजकर बुलवा लीजिए। नहीं तो वह सचमुच कुछ कर बैठेगी। आखिर, किनके लिए वह इतना सहेगी! बड़ी बहुरिया ने कहा है, भाभी के बच्चों की जूठन खाकर वह एक कोने में पड़ी रहेगी...।’ रात भर हरगोबिन को नींद नहीं आई। आँखों के सामने बड़ी बहुरिया बैठी रही — सिसकती, आँसू पोंछती हुई।