(i) भारत में आतंकवाद — कारण और निवारण
प्रस्तावना:
आतंकवाद आज भारत सहित सम्पूर्ण विश्व के लिए एक भयानक चुनौती बन चुका है। यह एक ऐसी अमानवीय प्रवृत्ति है जो भय, हिंसा और विनाश फैलाकर राष्ट्र की शांति और एकता को समाप्त करना चाहती है। भारत जैसे बहुसांस्कृतिक देश में आतंकवाद का दुष्प्रभाव विशेष रूप से गंभीर है, क्योंकि यहाँ विविध धर्म, जातियाँ और भाषाएँ हैं जिन्हें आपसी सौहार्द की आवश्यकता है।
आतंकवाद के कारण:
आतंकवाद के पीछे अनेक कारण हैं —
1. राजनीतिक स्वार्थ: कुछ संगठन सत्ता प्राप्ति या राजनीतिक दबाव बनाने के लिए हिंसा का मार्ग अपनाते हैं।
2. धार्मिक कट्टरता: धर्म के नाम पर भड़काई गई भावनाएँ लोगों को गलत दिशा में ले जाती हैं।
3. विदेशी हस्तक्षेप: कई विदेशी शक्तियाँ भारत की एकता को तोड़ने के लिए आतंकवाद को प्रोत्साहित करती हैं।
4. आर्थिक असमानता: गरीबी और बेरोज़गारी से ग्रस्त युवा आतंकवादी संगठनों के जाल में फँस जाते हैं।
आतंकवाद के दुष्परिणाम:
आतंकवाद का सबसे बड़ा दुष्परिणाम निर्दोष लोगों की हत्या और राष्ट्रीय संपत्ति की हानि है। इससे देश में भय, असुरक्षा और अस्थिरता फैलती है। विकास की गति रुक जाती है और जनता का विश्वास शासन से डगमगा जाता है।
निवारण के उपाय:
1. आतंकवाद के वित्तीय स्रोतों और विदेशी सहायता पर कड़ा नियंत्रण किया जाए।
2. युवाओं को शिक्षा, रोजगार और राष्ट्र–भक्ति की भावना से प्रेरित किया जाए।
3. साम्प्रदायिक सौहार्द और एकता को बढ़ावा दिया जाए।
4. सुरक्षा बलों को आधुनिक प्रशिक्षण और साधन उपलब्ध कराए जाएँ।
5. राष्ट्रों के बीच आपसी सहयोग से आतंकवाद की जड़ें काटी जा सकती हैं।
उपसंहार:
आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इसे समाप्त करने के लिए केवल हथियारों की नहीं, बल्कि विचारों की लड़ाई भी आवश्यक है। शिक्षा, एकता और मानवीयता ही इसका सच्चा निवारण है।
(ii) जनसंख्या वृद्धि के कारण लाभ और हानि
प्रस्तावना:
भारत विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन चुका है। जनसंख्या यदि नियंत्रित रहे तो विकास में सहायक होती है, किंतु जब यह अनियंत्रित होती है, तब यह एक गंभीर संकट बन जाती है।
जनसंख्या वृद्धि के कारण:
1. जन–जागरूकता का अभाव।
2. निरक्षरता और अंधविश्वास।
3. बाल–विवाह और अधिक संतान की इच्छा।
4. स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण मृत्यु–दर में कमी।
लाभ:
जनसंख्या वृद्धि से देश को श्रमशक्ति प्राप्त होती है। युवा वर्ग देश की उत्पादन शक्ति को बढ़ाता है। बाजार का विस्तार होता है और नई ऊर्जा का संचार होता है।
हानि:
1. बेरोज़गारी और गरीबी बढ़ती है।
2. खाद्यान्न, आवास और स्वास्थ्य–सुविधाओं पर दबाव पड़ता है।
3. पर्यावरण प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों की कमी होती है।
4. शिक्षा का स्तर गिरता है और अपराध बढ़ते हैं।
निवारण के उपाय:
1. परिवार–नियोजन कार्यक्रमों को प्रभावी रूप से लागू करना।
2. शिक्षा और विशेषकर महिला–शिक्षा को बढ़ावा देना।
3. ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या नियंत्रण के प्रति जागरूकता फैलाना।
4. स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाना।
उपसंहार:
संवेदनशील जनसंख्या नीति और नागरिकों के सहयोग से जनसंख्या–वृद्धि को नियंत्रित किया जा सकता है। नियंत्रित जनसंख्या ही समृद्ध राष्ट्र की पहचान है।
(iii) बेरोज़गारी की समस्या
प्रस्तावना:
बेरोज़गारी भारत की सबसे पुरानी और गंभीर सामाजिक–आर्थिक समस्या है। जब कोई व्यक्ति अपनी योग्यता के अनुसार काम नहीं प्राप्त कर पाता, तो वह बेरोज़गार कहलाता है। यह समस्या राष्ट्र की उन्नति के लिए बाधक है।
बेरोज़गारी के प्रकार:
1. शिक्षित बेरोज़गारी।
2. ग्रामीण बेरोज़गारी।
3. मौसमी बेरोज़गारी।
4. आंशिक या छिपी बेरोज़गारी।
कारण:
1. जनसंख्या में अत्यधिक वृद्धि।
2. शिक्षा का व्यावहारिक पक्ष का अभाव।
3. औद्योगिक विकास की मंद गति।
4. कृषि पर अत्यधिक निर्भरता।
5. सरकारी नौकरियों में सीमित अवसर।
परिणाम:
बेरोज़गारी से गरीबी, निराशा और अपराध जैसी सामाजिक बुराइयाँ फैलती हैं। युवा वर्ग नकारात्मक सोच अपनाता है जिससे राष्ट्र का भविष्य संकट में पड़ जाता है।
समाधान:
1. व्यावसायिक शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण को प्रोत्साहित करना चाहिए।
2. छोटे उद्योग, स्वरोजगार और स्टार्टअप योजनाओं को बढ़ावा दिया जाए।
3. कृषि के साथ–साथ ग्रामीण उद्योगों को भी विकसित किया जाए।
4. सरकार को 'एक जिला–एक उत्पाद' जैसी योजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए।
उपसंहार:
बेरोज़गारी का समाधान तभी संभव है जब शिक्षा, उद्योग और रोजगार के बीच संतुलन स्थापित हो। हर हाथ को काम मिले — यही सच्चे भारत का सपना है।
(iv) विज्ञान के चमत्कार
प्रस्तावना:
विज्ञान ने मानव–जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। यह आधुनिक युग की रीढ़ है। विज्ञान ने असंभव को संभव बना दिया है और मानव को अंधविश्वासों से मुक्त किया है।
विज्ञान के प्रमुख चमत्कार:
1. यातायात के क्षेत्र में: रेल, हवाईजहाज और मोटरगाड़ियाँ — सब विज्ञान की देन हैं।
2. संचार के क्षेत्र में: टेलीफोन, मोबाइल, इंटरनेट, उपग्रह — इनसे पूरी दुनिया एक परिवार बन गई है।
3. चिकित्सा में: आधुनिक शल्य–चिकित्सा, एक्स–रे, एम.आर.आई. और वैक्सीन से असंभव रोगों का उपचार संभव हुआ है।
4. अंतरिक्ष विज्ञान में: चंद्रमा और मंगल ग्रह तक मानव ने अपनी पहुँच बना ली है।
विज्ञान के दुष्परिणाम:
विज्ञान का दुरुपयोग विनाशकारी हो सकता है — जैसे परमाणु बम, पर्यावरण–प्रदूषण, युद्ध और नैतिक पतन।
उपसंहार:
विज्ञान मानवता के लिए वरदान है, यदि उसका प्रयोग विवेकपूर्ण ढंग से किया जाए। विज्ञान का उद्देश्य मानव–कल्याण होना चाहिए, न कि विनाश।
(v) मेरा प्रिय कवि
प्रस्तावना:
मेरा प्रिय कवि "जयशंकर प्रसाद" हैं। वे हिंदी के छायावाद युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उन्होंने हिंदी कविता को गहराई, दर्शन और सौन्दर्य प्रदान किया।
जीवन परिचय:
जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1889 में वाराणसी में हुआ। प्रारंभिक जीवन आर्थिक कठिनाइयों में बीता, लेकिन साहित्य के प्रति उनकी साधना कभी नहीं टूटी।
साहित्यिक योगदान:
उन्होंने कविता, नाटक, कहानी और उपन्यास सभी विधाओं में अमूल्य योगदान दिया। उनके काव्य में दर्शन, सौन्दर्य और राष्ट्रीयता का अद्भुत संगम है।
प्रमुख रचनाएँ:
उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं — "कामायनी", "झरना", "आँसू", "ध्रुवस्वामिनी" और "चंद्रगुप्त"। "कामायनी" उनका अमर काव्य है जिसमें मानव–जीवन के भाव, बुद्धि और इच्छा का समन्वय प्रस्तुत किया गया है।
उपसंहार:
प्रसाद जी केवल कवि नहीं, बल्कि राष्ट्र–जागरण के प्रवक्ता भी थे। उनकी कविताएँ आज भी हमें आदर्श, सौन्दर्य और आत्म–विश्वास की प्रेरणा देती हैं।