निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
(१) कृति पूर्ण कीजिए: आरती के लिए:
(इस कृति के लिए पद्यांश में आरती के तत्वों की जानकारी देनी है।)
(२) उचित मिलान कीजिए:
\[\begin{array}{|l|l|} \hline \textbf{अ} & \textbf{ब} \\ \hline \text{(१) ईश्वर} & \text{काल} \\ \hline \text{(२) आकाश} & \text{प्रभु} \\ \hline \text{(३) समय} & \text{खोजत} \\ \hline \text{(४) खोज} & \text{गगन} \\ \hline \end{array}\]
(३) 'विद्यार्थी जीवन में गुरु का महत्त्व' इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए।
(१) कृति पूर्ण कीजिए: आरती के लिए:
- दीप: आरती का मुख्य तत्व, प्रभु के प्रति प्रकाश का प्रतीक।
- भक्ति: ईश्वर के प्रति श्रद्धा और समर्पण।
- प्रार्थना: मन से की गई ईश्वर की स्तुति।
(२) उचित मिलान:
\[\begin{array}{|l|l|} \hline अ & ब \\ \hline \text{(१) ईश्वर} & \text{प्रभु} \\ \hline \text{(२) आकाश} & \text{गगन} \\ \hline \text{(३) समय} & \text{काल} \\ \hline \text{(४) खोज} & \text{खोजत} \\ \hline \end{array}\]
- ईश्वर-प्रभु: समानार्थी, दोनों भगवान को दर्शाते हैं।
- आकाश-गगन: समानार्थी, दोनों को संदर्भित करते हैं।
- समय-काल: समानार्थी, दोनों समय को दर्शाते हैं।
- खोज-खोजत: खोज और खोजत एक ही क्रिया के रूप हैं।
(३) विद्यार्थी जीवन में गुरु का महत्त्व:
गुरु विद्यार्थी जीवन को दिशा और प्रेरणा देते हैं। वे ज्ञान, नैतिकता और आत्मविश्वास सिखाते हैं। गुरु की मार्गदर्शन से विद्यार्थी अपने लक्ष्य प्राप्त करते हैं। उदाहरण के लिए, गुरु द्रोणाचार्य ने अर्जुन को श्रेष्ठ धनुर्धर बनाया। गुरु का सम्मान विद्यार्थी की सफलता की नींव है। (४६ शब्द)
‘बिस्कोहर की माटी’ पाठ के आधार पर गाँव की प्रकृति का गर्मी, सर्दी और वर्षा ऋतुओं के अनुभव वर्णन कीजिए। वहाँ के लोग गर्मी ऋतु के प्रकोप से बचने के लिए क्या उपाय करते थे?
‘अपना मालवा खाऊँ–उजाऊ सभ्यता में.....’ पाठ में विक्रमादित्य, भोज और मुँज आदि राजाओं का उल्लेख किस संदर्भ में आया है? स्पष्ट कीजिए।
‘तोड़ो’ कविता का कवि क्या तोड़ने की बात करता है और क्यों?
“इसी तरह भरता और खाली होता है यह शहर” पंक्ति के संदर्भ में बनारस शहर के ‘भरने’ और ‘खाली’ होने से क्या अभिप्राय है?
“मैंने निज दुर्बल पद-बल, उससे हारी होड़ लगाई” ‘देवसेना का गीत’ से उद्धृत इस पंक्ति से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?