Question:

 'निबंध विषय: विद्यार्थी जीवन
संकेत-बिन्दु:
(a) परिचय
(b) विद्यालय में प्रवेश
(c) सहपाठी
(d) अध्यापकों के प्रति कृतज्ञता
(e) उपसंहार
 

Updated On: Nov 10, 2025
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Solution and Explanation

परिचय: 
विद्यार्थी जीवन मनुष्य के समूचे व्यक्तित्व का आधार-काल है। इसी समय में अनुशासन, परिश्रम, समय-प्रबंधन और चरित्र जैसे मूल्यों की नींव पड़ती है। विद्यार्थी जितना सजग और लक्ष्य-सचेत होगा, आगे का जीवन उतना ही सफल और संतुलित बनेगा।

विद्यालय में प्रवेश:
विद्यालय में प्रवेश के साथ ही घर की सीमित दुनिया से बाहर एक नई दुनिया का आरंभ होता है। प्रार्थना-सभा, कक्षाएँ, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएँ और खेल का मैदान—सब मिलकर सीखने का समग्र वातावरण बनाते हैं। नियमित रूप से यूनिफॉर्म पहनना, समय पर पहुँचना और गृहकार्य करना विद्यार्थी को जिम्मेदार बनाता है।

सहपाठी:
सहपाठी विद्यार्थी-जीवन की ऊर्जा होते हैं। आपसी सहयोग, समूह-अध्ययन, वाद-विवाद, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियाँ मित्रता को गहरा करती हैं। सहपाठियों के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा लक्ष्य प्राप्ति में प्रेरक बनती है और असफलता का बोझ भी साझा हो जाता है।

अध्यापकों के प्रति कृतज्ञता:
अध्यापक केवल पाठ नहीं पढ़ाते, वे जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं — कभी सख्ती से, कभी स्नेह से। वे हमारी कमियाँ पहचानकर सुधार का मार्ग दिखाते हैं, पुस्तकालय का सही उपयोग कराना, विषय चुनने में मार्गदर्शन देना और परीक्षा-भय दूर करना उनकी सतत सेवा है। उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवनभर निभाया जाने वाला दायित्व है।

उपसंहार:
विद्यार्थी जीवन अवसर और दायित्व — दोनों का समन्वय है। यदि हम समय का सम्मान करें, मेहनत को आदत बनाएं और गुरुजन तथा सहपाठियों के साथ सौहार्द रखें, तो यही काल भविष्य की सफलता का पक्का आधार बन जाता है।

Final Answer:
विद्यार्थी जीवन में अनुशासन, परिश्रम, मित्रता और गुरु-श्रद्धा — ये चार स्तंभ जितने मजबूत होंगे, उतना ही उज्ज्वल भविष्य निर्मित होगा।

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