जंगल प्रकृति का वह अमूल्य उपहार हैं जो न केवल मानव के लिए, बल्कि समस्त जीव-जंतुओं के लिए जीवनदायी हैं। वे पर्यावरण को शुद्ध रखने, वर्षा लाने, जल-संरक्षण, मृदा को सुरक्षित रखने और जैव विविधता को बनाए रखने में अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन वर्तमान समय में विकास के नाम पर हो रही अंधाधुंध जंगलों की कटाई ने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
जंगलों के लुप्त होने का सबसे प्रत्यक्ष दुष्परिणाम जलवायु परिवर्तन के रूप में सामने आ रहा है। वनों की कटाई से वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती जा रही है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग, बर्फ के ग्लेशियरों का पिघलना, समुद्री जलस्तर में वृद्धि, और मौसम के असंतुलन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।
इसके साथ ही वन्यजीवों का आवास नष्ट होने से कई प्रजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर पहुँच चुकी हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले बढ़ गए हैं क्योंकि जानवर भोजन और सुरक्षा की तलाश में शहरों की ओर आने लगे हैं। मृदा क्षरण, जलस्रोतों का सूखना और जैव विविधता का विनाश भी जंगलों की कमी के कारण हो रहा है।
यदि यह क्रम यूँ ही चलता रहा तो आने वाले वर्षों में पृथ्वी का संतुलन बिगड़ जाएगा और भावी पीढ़ियाँ शुद्ध वायु, जल और प्राकृतिक सौंदर्य से वंचित रह जाएँगी।
इसलिए अब समय आ गया है कि हम जंगलों को केवल संसाधन न समझें, बल्कि उन्हें जीवित प्राणी की भाँति सम्मान दें और संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाएँ।