'कला-कला के लिए' सिद्धान्त यह विचार प्रस्तुत करता है कि कला का उद्देश्य केवल कला का आनंद लेना होना चाहिए, न कि किसी सामाजिक या राजनीतिक उद्देश्य को पूरा करना। इसका तात्पर्य यह है कि कला को अपनी स्वतंत्रता में रहकर ही पूर्ण रूप से जीवित रखा जा सकता है, और इसे किसी उद्देश्य से जोड़ा नहीं जाना चाहिए।
यह सिद्धान्त विशेष रूप से कला के शुद्ध रूप को मान्यता देता है, जिसमें कला को अपने आंतरिक सौंदर्य और अभिव्यक्ति के माध्यम से जीवन में स्थान प्राप्त करना चाहिए। इस विचारधारा के अनुसार, कला का प्रमुख उद्देश्य समाज में किसी परिवर्तन या राजनीतिक उथल-पुथल को जन्म देना नहीं, बल्कि आत्म-निर्भरता, सौंदर्य और व्यक्तिगत अनुभव को उजागर करना है।
इस सिद्धान्त में यह माना गया है कि अगर कला किसी निश्चित उद्देश्य, जैसे राजनीतिक विचारधारा या समाज सुधार, से जुड़ी हो, तो उसकी स्वतंत्रता और शुद्धता को खतरा हो सकता है। कला को केवल अपनी आंतरिक प्रेरणा से चलने देना चाहिए, ताकि वह असली रूप में अपनी ताकत और प्रभाव को दिखा सके।
इस विचारधारा को प्रमुखता से प्रस्तुत करने वाले कलाकार और विचारक मानते हैं कि कला को केवल अपनी श्रेष्ठता और भावनात्मक अपील के कारण सराहा जाना चाहिए, न कि बाहरी कारणों या दबावों के कारण। इस दृष्टिकोण में कला को केवल 'कला के लिए' देखा जाता है, और उसकी कोई और उद्देश्य नहीं होता।