Question:

‘गाँव में मूल्य परिवर्तन अधिक स्पष्ट रूप से पहचाना जाता है।’ ‘बिस्कोहर की माटी’ पाठ के आधार पर सटीक उदाहरण इस कथन की पुष्टि कीजिए। 
 

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जब किसी कथन की पुष्टि करनी हो, तो पाठ से ठोस उदाहरण, पात्रों की प्रतिक्रिया और लेखक के भावात्मक संकेतों को अवश्य शामिल करें।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘बिस्कोहर की माटी’ पाठ में लेखक ने अपने गाँव के प्रति भावनात्मक लगाव और वहाँ होने वाले सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तनों का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया है। पाठ के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि गाँव — जो कभी आत्मीयता, सहयोग, सरलता और सामूहिकता के केंद्र थे — अब वहाँ भी भौतिकवाद, स्वार्थ और सामाजिक दूरी ने अपनी जगह बना ली है।
लेखक जब वर्षों बाद अपने गाँव ‘बिस्कोहर’ लौटता है, तो वह पाता है कि गाँव वही है — उसकी मिट्टी, हवा, भाषा और भावनाएँ अब भी परिचित हैं — लेकिन लोगों का व्यवहार, संबंधों की ऊष्मा और सामाजिक ताने-बाने में परिवर्तन आ चुका है।
पहले जहाँ कोई बीमार होता था तो पूरे गाँव के लोग चिंता करते थे, अब हर कोई अपने घर तक सीमित हो गया है। रिश्तेदारों के स्थान पर ‘गेस्ट’ की तरह स्वागत होता है। पहले जिन गलियों से लेखक हर्ष के साथ गुज़रता था, अब उनमें अपरिचय का भाव महसूस होता है। बच्चे मोबाइल में व्यस्त हैं और बुजुर्ग अकेले हो चले हैं।
यहाँ लेखक यह महसूस करता है कि ‘मूल्य’ — जैसे सहानुभूति, सामूहिकता, सादगी, और परस्पर सहयोग — अब गाँवों में भी लुप्त होते जा रहे हैं। पहले जो गाँव शहरों की तुलना में अधिक आत्मीय, सुरक्षित और भावपूर्ण होते थे, अब वहाँ भी भौतिक चकाचौंध और एकाकीपन प्रवेश कर चुका है।
इस प्रकार यह कथन कि “गाँव में मूल्य परिवर्तन अधिक स्पष्ट रूप से पहचाना जाता है” — पूर्णतः सत्य सिद्ध होता है, क्योंकि लेखक स्वयं इस परिवर्तन का साक्षात अनुभव करता है और उसका वर्णन अत्यंत व्यथित मन से करता है।
निष्कर्ष:
'बिस्कोहर की माटी' केवल एक यात्रा-वृत्तांत नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का दस्तावेज़ है, जिसमें गाँवों में मूल्यों के क्षरण को गहराई से अनुभव किया गया है। लेखक के भाव दर्शाते हैं कि मूल्यों की यह हानि केवल शहरों की ही नहीं, अब गाँवों की भी सच्चाई बन चुकी है।
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