गंडक नदी का जल सदियों से चंचल रहा है। यह नदी विभिन्न क्षेत्रों से होकर बहती है और इसका प्रवाह तेज एवं कभी-कभी अनियमित होता है। गंडक नदी नेपाल के हिमालय क्षेत्र से निकलती है और बिहार होते हुए गंगा नदी में मिल जाती है। इसका स्रोत पहाड़ी होने के कारण इस नदी का जल प्रवाह बहुत ही वेगवान होता है, विशेष रूप से मानसून के समय में इसका स्वरूप अत्यंत उग्र हो जाता है।
इस नदी का चंचल स्वभाव कई बार बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का कारण भी बनता है। जब वर्षा अधिक होती है, तब इसका जलस्तर अचानक बढ़ जाता है और यह आसपास के गांवों तथा खेतों को प्रभावित करती है। यही कारण है कि इसे ‘चंचल’ कहा गया है, क्योंकि इसका बहाव स्थिर नहीं रहता और यह कभी-कभी दिशा भी बदल देती है।
इतिहास में भी यह देखा गया है कि गंडक नदी ने अपने मार्ग में कई बार परिवर्तन किया है, जिससे स्थानीय भूगोल और मानव जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है। इसका पानी कहीं-कहीं जीवनदायिनी है तो कहीं विनाशकारी भी सिद्ध होता है।
इस प्रकार, गंडक नदी का प्रवाह न केवल भौगोलिक दृष्टिकोण से, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इसका चंचल स्वभाव हमें यह संदेश देता है कि प्रकृति को समझकर और उसका सम्मान करते हुए ही हमें विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।