(i) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल — जीवन परिचय और प्रमुख रचना
जन्म और शिक्षा:
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जन्म सन् 1884 ई. में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में हुआ। उन्होंने संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी का गहन अध्ययन किया। वे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हिंदी के आचार्य के रूप में कार्यरत रहे।
व्यक्तित्व और योगदान:
वे हिंदी साहित्य के प्रथम वैज्ञानिक आलोचक और इतिहासकार माने जाते हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य को लोक–जीवन से जोड़कर उसकी सामाजिक महत्ता सिद्ध की। उनका जीवन सादगी, सत्यनिष्ठा और अनुशासन से पूर्ण था।
साहित्यिक योगदान:
उन्होंने हिंदी आलोचना को तर्क, प्रमाण और विश्लेषण की दृष्टि से समृद्ध बनाया। उनका लेखन वस्तुनिष्ठ और यथार्थपरक था।
प्रमुख रचना:
"हिंदी साहित्य का इतिहास" उनकी अमर कृति है, जिसमें हिंदी साहित्य का प्राचीन से आधुनिक काल तक वैज्ञानिक विवेचन मिलता है।
निष्कर्ष:
आचार्य शुक्ल आधुनिक हिंदी आलोचना के जनक और साहित्य–इतिहास लेखन के पथ–प्रदर्शक थे।
(ii) डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद — जीवन परिचय और प्रमुख रचना
जन्म और शिक्षा:
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 3 दिसम्बर 1884 को बिहार राज्य के जीरादेई गाँव में हुआ। वे प्रारंभ से ही मेधावी छात्र थे और कानून की पढ़ाई करके वकील बने।
व्यक्तित्व और योगदान:
वे महात्मा गाँधी के विचारों से प्रभावित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुए। स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने राष्ट्र की सेवा की। उनका व्यक्तित्व सादगी, ईमानदारी और राष्ट्र–भक्ति का प्रतीक था।
साहित्यिक योगदान:
उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर अनेक ग्रंथ लिखे। उनकी रचनाओं में देशभक्ति और नैतिकता की भावना प्रबल है।
प्रमुख रचना:
"आत्मकथा" उनकी प्रसिद्ध रचना है, जिसमें उनके जीवन के अनुभव और स्वतंत्रता आंदोलन के प्रसंग मिलते हैं।
निष्कर्ष:
डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद भारत–रत्न और राष्ट्र के सच्चे सेवक थे। वे भारतीय राजनीति और समाज के प्रेरणास्रोत हैं।
(iii) जयशंकर प्रसाद — जीवन परिचय और प्रमुख रचना
जन्म और शिक्षा:
जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1889 ई. में वाराणसी में हुआ। पारिवारिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने साहित्य–साधना जारी रखी।
व्यक्तित्व और योगदान:
वे हिंदी के छायावाद युग के प्रमुख कवि, नाटककार और कथाकार थे। उनका स्वभाव गंभीर, कोमल और सृजनशील था। उन्होंने हिंदी साहित्य को दर्शन, सौन्दर्य और राष्ट्रीयता की भावना से ओतप्रोत किया।
साहित्यिक योगदान:
उनकी कविताओं में भावनात्मक गहराई और दार्शनिक दृष्टि का सुंदर मेल है। उन्होंने "कामायनी", "आँसू", "झरना" जैसी काव्य–कृतियाँ और "चंद्रगुप्त", "ध्रुवस्वामिनी" जैसे नाटक लिखे।
प्रमुख रचना:
"कामायनी" उनकी सर्वश्रेष्ठ कृति है, जिसमें मानव–जीवन के भाव, बुद्धि और इच्छा के संघर्ष और समन्वय का चित्रण है।
निष्कर्ष:
प्रसाद जी हिंदी साहित्य के सर्वांगीण सर्जक और राष्ट्रीय चेतना के कवि थे।