Question:

‘भक्तिन’ पाठ के आधार पर लिखिए कि एक बच्ची का पाँच वर्ष की अवस्था में ब्याह और नौ वर्ष की अवस्था में गौना कर उसे ससुराल विदा करना, तत्कालीन भारतीय समाज की किस कुरीति की ओर संकेत करता है? वर्तमान भारतीय समाज में क्या स्थिति है? स्पष्ट कीजिए।

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जब प्रश्न में किसी सामाजिक कुरीति का विश्लेषण हो, तो उसका ऐतिहासिक और वर्तमान दोनों संदर्भों में मूल्यांकन अवश्य करें।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘भक्तिन’ पाठ में जिस बच्ची का पाँच वर्ष की उम्र में विवाह और नौ वर्ष में गौना हो जाता है, वह भारतीय समाज में व्याप्त **बाल-विवाह** जैसी सामाजिक कुरीति की ओर संकेत करता है। यह प्रथा न केवल एक मासूम बालिका के बचपन और शिक्षा के अधिकार को छीन लेती है, बल्कि मानसिक, शारीरिक और सामाजिक रूप से भी उसके विकास में बाधक बनती है।
तत्कालीन भारतीय समाज में बालिकाओं को परिवार की प्रतिष्ठा और परंपराओं की आड़ में बलि का बकरा बना दिया जाता था। ‘भक्तिन’ की माँ की बेबसी और सामाजिक दबाव को लेखिका ने बेहद मार्मिकता से प्रस्तुत किया है।
वर्तमान स्थिति की बात करें तो आज भले ही क़ानूनी रूप से बाल-विवाह अपराध माना जाता है, लेकिन ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में यह कुप्रथा आज भी ज़मीर के अंधकार में जीवित है। शिक्षा, जागरूकता और महिला सशक्तिकरण की पहल होने के बावजूद सामाजिक दबाव और आर्थिक कमजोरी इस समस्या को समाप्त नहीं कर सके हैं।
निष्कर्षतः, ‘भक्तिन’ पाठ केवल एक व्यक्ति की कथा नहीं बल्कि पूरे समाज की मनोवृत्ति पर चोट करता है।
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