‘बात सीधी थी पर’ कविता में भाषा के चक्कर में ‘बात का टेढ़ी फँस जाना’ से क्या अभिप्राय है ?
‘बात सीधी थी पर’ कविता में कवि यह कहता है कि कभी-कभी किसी बात को कहने की प्रक्रिया इतनी जटिल हो जाती है कि उसकी सादगी और स्पष्टता नष्ट हो जाती है।
‘बात का टेढ़ी फँस जाना’ का आशय है — मूल भाव या मुद्दा संवाद की शैली, भाषा या विधि के कारण विकृत हो जाना। ऐसा तब होता है जब व्यक्ति स्पष्ट कहने की बजाय घुमा-फिराकर या कृत्रिम भाषा में बात कहने लगे।
‘बाज़ार में कभी–कभी आवश्यकता ही शोषण का रूप धारण कर लेती है।’ — इस कथन को उदाहरण सहित ‘बाज़ार–दर्शन’ पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए।
'यह दंतुरित मुस्कान' कविता में शिशु से मिलकर कवि को कैसी अनुभूति होती है ?
'संगतकार' कविता के माध्यम से कवि ने किस सत्य को उजागर किया है ?
किशोरों में बढ़ती स्क्रीन लत — इस विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।
यशोधर बाबू की पत्नी मुख्यतः पुराने संस्कारों वाली थी, फिर किन कारणों से वह आधुनिक बन गई ? उसके इस आचरण पर यशोधर बाबू की क्या प्रतिक्रिया थी ?