चरण 1: प्रश्न को समझना:
प्रश्न पूछ रहा है कि पृथ्वी पर कितने "रत्न" (रत्नानि) हैं।
चरण 2: मुख्य अवधारणा:
यह प्रश्न एक प्रसिद्ध संस्कृत सुभाषित (सूक्ति) पर आधारित है।
श्लोक है:
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम्।
मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते॥
चरण 3: विस्तृत व्याख्या:
इस श्लोक का अनुवाद है: "पृथ्वी पर तीन रत्न हैं: जल, अन्न और अच्छे वचन (सुभाषित)। मूर्खों द्वारा पत्थर के टुकड़ों को रत्न की संज्ञा दी जाती है।"
इस श्लोक के अनुसार, असली रत्न जीवन और ज्ञान के लिए आवश्यक हैं, न कि भौतिक रत्न।
इसलिए, पृथ्वी पर तीन रत्न हैं।
चरण 4: अंतिम उत्तर:
सही उत्तर त्रीणि (तीन) है।