Question:

नितरां नीचोऽस्मीति त्वं खेदं कूप! कदापि मा कृथा:। 
अत्यन्तसरसहृदयो यत: परेषां गुणग्रहीताऽसि।। (सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए) 
 

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यहाँ 'गुण' शब्द के दो अर्थ हैं: कुएँ के सन्दर्भ में 'रस्सी' और व्यक्ति के सन्दर्भ में 'अच्छे गुण'।
Updated On: Feb 19, 2026
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Solution and Explanation

Step 1: Understanding the Concept:
यह एक सूक्ति (श्लोक) है जिसमें अन्योक्ति के माध्यम से गहरे अर्थ को समझाया गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
सन्दर्भ: प्रस्तुत श्लोक 'अन्योक्तिविलास:' नामक पाठ से लिया गया है।
हिन्दी अनुवाद:
"हे कुएँ! मैं बहुत नीचा (गहरा) हूँ, ऐसा सोचकर तुम कभी दुखी मत होओ।
क्योंकि तुम अत्यंत सरस (जल से युक्त/कोमल) हृदय वाले हो और दूसरों के गुणों (रस्सियों) को ग्रहण करने वाले हो।"
अर्थान्तर: विद्वान व्यक्ति को भी अपनी विनम्रता (नीचा होना) पर दुखी नहीं होना चाहिए क्योंकि वह गुणवान होता है।
Step 3: Final Answer:
यहाँ कुएँ के माध्यम से विनम्र और गुणी व्यक्ति की प्रशंसा की गई है।
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