Comprehension

निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित दिए गए तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए : 
“मैं ब्राह्मणी हूँ, मुझे तो अपने धर्म – अतिथि देव की उपासना का पालन करना चाहिए, परन्तु यहाँ...... नहीं–नहीं सब विधर्मी दया के पात्र नहीं। परन्तु यह दया तो नहीं..... कर्तव्य करना है। तब?” 
मुग़ल अपनी तलवार टेककर उठ खड़ा हुआ। ममता ने कहा – “क्या आश्चर्य है कि तुम छल करो, ठहरो!” 
“छल! नहीं, तब नहीं स्त्री! जाता हूँ, तैमूर का वंशधर स्त्री से छल करेगा? जाता हूँ। भाग्य का खेल है।”

Question: 1

उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।

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स्रोत लिखते समय पाठ का नाम और लेखक का नाम दोनों स्पष्ट रूप से लिखना आवश्यक है।
Updated On: Oct 27, 2025
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Solution and Explanation

यह गद्यांश प्रसिद्ध निबंध 'माँ मैं ब्राह्मणी हूँ' से लिया गया है, जिसके लेखक जैनेंद्र कुमार हैं। इस पाठ में मानवीय करुणा, धर्मपालन और नैतिक साहस का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया गया है।
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Question: 2

गद्यांश के रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

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व्याख्या करते समय केवल अर्थ न लिखें, पात्र की भावनाएँ और नैतिक संघर्ष भी अवश्य जोड़ें।
Updated On: Oct 27, 2025
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Solution and Explanation

रेखांकित अंश — "छल! नहीं तब नहीं स्त्री! जाता हूँ, तैमूर का वंशधर स्त्री से छल करेगा? जाता हूँ। भाग्य का खेल है।" — का भाव यह है कि मुगल सेनापति जब ममता के समक्ष खड़ा होता है, तब उसके भीतर का नैतिक साहस जाग उठता है।
वह यह अनुभव करता है कि एक निर्बल और असहाय स्त्री के साथ छल करना उसकी वीरता नहीं, कायरता होगी। वह कहता है कि तैमूर जैसे वीरवंश का वंशधर कभी स्त्री से छल नहीं कर सकता। यह उसका आत्मसम्मान और न्यायप्रियता का परिचायक है।
इस पंक्ति में पुरुष की नैतिकता और मानवीयता की झलक मिलती है। वह अपने धर्म, वंश और आत्मगौरव को बनाए रखने का निर्णय लेता है। अंत में वह यह कहकर चला जाता है कि यह सब भाग्य का खेल है।
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Question: 3

"छल! नहीं तब नहीं स्त्री! जाता हूँ, तैमूर का वंशधर स्त्री से छल करेगा? जाता हूँ।" वाक्य किसने कहा और क्यों?

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जब प्रश्न "किसने कहा और क्यों" पूछा जाए, तो पात्र का नाम, उसकी परिस्थिति और उसके कथन का उद्देश्य तीनों अवश्य बताएं।
Updated On: Oct 27, 2025
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Solution and Explanation

यह वाक्य मुगल सैनिक ने कहा था। जब वह ममता के घर में युद्ध के दौरान पहुँचता है, तो प्रारंभ में उसके मन में हिंसा और छल की भावना होती है। किंतु ममता की निष्ठा, साहस और ब्राह्मणी धर्मपालन देखकर उसके मन में करुणा और नैतिक चेतना जागृत हो जाती है।
वह यह समझता है कि एक नारी के साथ छल करना उसके धर्म और कुल की प्रतिष्ठा के विरुद्ध होगा। वह आत्मगौरव और मर्यादा की भावना से प्रेरित होकर अपने कुकर्म से स्वयं को रोक लेता है। इसलिए वह कहता है — "तैमूर का वंशधर स्त्री से छल करेगा?" और वहाँ से चला जाता है।
यह प्रसंग इस बात का प्रतीक है कि सच्चा बल केवल शारीरिक नहीं, बल्कि नैतिक बल होता है। इस वाक्य में मुगल सैनिक की आत्मजागृति और मानवता का संदेश निहित है।
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