नैतिकता का अर्थ है सही और गलत का भेद जानना और उसे अपनाना। नैतिकता का मूल उद्देश्य केवल अपनी भलाई के बारे में नहीं होता, बल्कि यह समाज और दूसरों के भले के लिए काम करने के बारे में होता है। जब हम कहते हैं "नैतिकतायाः प्राणभूतं तत्वं परेषां हितम्", तो इसका अर्थ है कि नैतिकता का वास्तविक उद्देश्य दूसरों की भलाई करना है, न कि सिर्फ खुद के लिए लाभ प्राप्त करना। नैतिकता हमें यह सिखाती है कि हम अपनी खुशी और सफलता के लिए दूसरों की खुशी और सफलता को महत्व दें। यह सभी प्रकार की अच्छाई और सद्गुणों की नींव है।
उदाहरण के तौर पर, अगर एक व्यक्ति केवल अपने फायदे के लिए काम करता है, तो वह नैतिक नहीं है। लेकिन यदि वह अपने काम से दूसरों की मदद करता है और उनके भले के लिए कार्य करता है, तो वह नैतिक व्यक्ति कहलाएगा।