"मुनि केवट के बैन, प्रेम लपेते अटपटे।
बिसरे करूना ऐन, चितइ जानकी लखन तनु।"
उपर्युक्त पंक्तियों में छन्द है :
Step 1: छन्द-लक्षण मिलान.
दोहा-परिवार का सौरठा छन्द 24 मात्राएँ (13+11) के विन्यास के साथ आता है, किन्तु दुति/गति-भेद से अंत्यानुप्रास-विन्यास भिन्न होता है।
Step 2: पंक्तियों का विन्यास.
दोहा-सदृश मात्रा-विन्यास होते हुए यति/तुकान्त के कारण यह सौरठा के रूप में प्रतिष्ठित है; अतः (2) सही।
मैं तुमसे हमेशा पाँच साल बड़ा रहूँगा। (संयुक्त वाक्य में बदलिए।)
अपनी बात चटपट कहो और अपनी राह लो। (रचना की दृष्टि से वाक्य-भेद लिखिए।)
जैसे ही हँसी साठवें की जगह आठवीं लिखा वैसे ही सब नंबर गायब! (रचना की दृष्टि से वाक्य-भेद लिखिए।)
मेरे दरजे में आओगे, तो दोपहर पसीना आ जाएगा। (सरल वाक्य में रूपांतरित कीजिए।)
सफल खिलाड़ी का कोई निशाना खाली नहीं जाता। (मिश्र वाक्य में बदलिए।)