'करुण रस' का स्थायीभाव है :
Step 1: Recall ras–sthāyibhāva pairs.
करुण रस का स्थायीभाव शोक माना गया है (दुःख/विरह से उत्पन्न)।
Step 2: Eliminate others.
भय — भयानक रस; विस्मय — अद्भुत रस; निर्वेद — शान्त रस से सम्बद्ध। इसलिए (4) सही है।
मैं तुमसे हमेशा पाँच साल बड़ा रहूँगा। (संयुक्त वाक्य में बदलिए।)
अपनी बात चटपट कहो और अपनी राह लो। (रचना की दृष्टि से वाक्य-भेद लिखिए।)
जैसे ही हँसी साठवें की जगह आठवीं लिखा वैसे ही सब नंबर गायब! (रचना की दृष्टि से वाक्य-भेद लिखिए।)
मेरे दरजे में आओगे, तो दोपहर पसीना आ जाएगा। (सरल वाक्य में रूपांतरित कीजिए।)
सफल खिलाड़ी का कोई निशाना खाली नहीं जाता। (मिश्र वाक्य में बदलिए।)