Question:

जीव–जंतुओं का घटता संसार — लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए : 
 

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पर्यावरण संबंधी लेखों में आँकड़ों से अधिक भावनात्मक जुड़ाव और जिम्मेदारी की भावना को केंद्र में रखें।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

एक समय था जब सुबह की शुरुआत कोयल की कूक, गौरैया की चहचहाहट और खेतों में दौड़ते हिरणों की छवि से होती थी। लेकिन आज?
हमने विकास के नाम पर प्रकृति की सबसे सुंदर रचना — जीव-जंतुओं — को धीरे-धीरे मिटा दिया।
अब शहरों में गौरैया ढूँढना दुर्लभ है, जंगलों में बाघ गिने-चुने रह गए हैं, और कई पक्षियाँ हमारे नाम तक भूल गई हैं।
बचपन में जब दादी कहानियाँ सुनाती थीं, तो उनमें शेर, सियार, तोता, हाथी, साँप सब जीवंत होते थे। आज वही कहानियाँ बच्चों को कल्पना लगती हैं, हकीकत नहीं।
हमने अपने लालच में जंगल काट डाले, जलाशय सुखा दिए, और रासायनिक खेती से ज़मीन को ज़हर बना दिया — और इसके साथ ही हमने अनजाने में कई प्रजातियों को समाप्ति की कगार पर पहुँचा दिया।
क्या हम भूल गए हैं कि यह पृथ्वी केवल मनुष्यों की नहीं है?
यह पेड़ों, पक्षियों, जलचर, नभचर और धरती पर रेंगते हर प्राणी की है।
यदि जीव-जंतु नहीं होंगे, तो पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) असंतुलित हो जाएगा — और इसका प्रभाव अंततः हमारे अस्तित्व पर भी पड़ेगा।
अब भी समय है — हम प्रकृति से जुड़ें, जैव विविधता को बचाएँ, पक्षियों के लिए पानी रखें, जंगलों को काटने से रोकेँ और बच्चों को उनके अधिकारों सहित इन प्राणियों से भी परिचित कराएँ।
हम जितनी जल्दी यह समझेंगे कि ‘उनका जीवन भी हमारा जीवन है’, उतना ही सुरक्षित होगा हमारा भविष्य।
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