'इत्यादि' में सन्धि है :
Step 1: Observe substitution.
'इति + आदि' के मेल पर 'इत्यादि'—यहाँ इ + आ के संयोग में य् का आगम दिखता है, जिसे यण सन्धि कहते हैं।
Step 2: Differentiate.
गुण/वृद्धि स्वर-वृद्धि कराते हैं; जश्त्व व्यञ्जन-परिवर्तन—यहाँ उपयुक्त नहीं। इसलिए (1) सही।
मैं तुमसे हमेशा पाँच साल बड़ा रहूँगा। (संयुक्त वाक्य में बदलिए।)
अपनी बात चटपट कहो और अपनी राह लो। (रचना की दृष्टि से वाक्य-भेद लिखिए।)
जैसे ही हँसी साठवें की जगह आठवीं लिखा वैसे ही सब नंबर गायब! (रचना की दृष्टि से वाक्य-भेद लिखिए।)
मेरे दरजे में आओगे, तो दोपहर पसीना आ जाएगा। (सरल वाक्य में रूपांतरित कीजिए।)
सफल खिलाड़ी का कोई निशाना खाली नहीं जाता। (मिश्र वाक्य में बदलिए।)