चरण 1: पृष्ठभूमि समझें।
1997 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने Vishaka & Others v. State of Rajasthan फैसले में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम हेतु दिशानिर्देश (विषाखा गाइडलाइन्स) जारी किए। इन दिशानिर्देशों ने प्रत्येक नियोक्ता पर रोकथाम, निषेध और निवारण की जिम्मेदारी डाली।
चरण 2: वैधानिक रूप।
इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर 2013 में कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम लागू हुआ, जिसमें आंतरिक शिकायत समिति (ICC)/ स्थानीय समिति की व्यवस्था और शिकायत निवारण की समय-सीमा तय की गई।
निष्कर्ष: विषय यौन उत्पीड़न से संबद्ध है, इसलिए सही विकल्प (1)।