स्पष्टीकरण:
ताल तिलवाड़ा एक 16 मात्राओं की ताल है, जिसका प्रयोग विशेषकर खयाल गायन में मंद (धीमी) गति के लिए किया जाता है। यह ताल खयाल गायन की शास्त्रीय रचनाओं में विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि इसकी धीमी गति में रागों की गहरी भावनाओं और नयनों को अभिव्यक्त किया जा सकता है।
ताल तिलवाड़ा की संरचना चार भागों (विभागों) में विभाजित होती है, जिसमें प्रत्येक विभाग में चार मात्राएँ होती हैं। इसके प्रत्येक विभाग को सुनियोजित तरीके से प्रस्तुत किया जाता है ताकि लय और ताल का संतुलन बना रहे। इसकी ताली-खाली की व्यवस्था इस प्रकार होती है:
ताली 1 (सम), ताली 5, खाली 9, ताली 13।
यह ताली-खाली की व्यवस्था ताल की लयबद्धता को बनाए रखती है और इसके अनुशासन को बढ़ाती है। सम (ताली 1) से लेकर ताली 13 तक की योजना ताल के धारा को सुनियोजित करती है, और प्रत्येक खली के साथ वह ताल का प्रभाव और अधिक स्पष्ट होता है।
ताल तिलवाड़ा का प्रयोग विशेष रूप से धीमे गति के खयाल गायन में किया जाता है, जहाँ गायक या वादक राग के भावनात्मक पहलुओं को गहराई से प्रस्तुत करते हैं। यह ताल संगीत की गति और रूप को संरक्षित रखते हुए उसकी सुंदरता को और भी बढ़ाता है।