रेखांकित पदों में से किसी एक पद में प्रयुक्त विभक्तितथा संबन्धित नियम का उल्लेख कीजिए -
युंहं पीरित: उद्धानं अस्ति।
श्रीसीतारामभ्यां नम:
आदर्श सिरसा खल्वटौटिस्ट ।
(i) युंहं पीरित: उद्धानं अस्ति।
यह वाक्य एक वर्तमानी विभक्ति के प्रयोग को दर्शाता है। 'युंहं' शब्द में 'युं' शब्द 'पुंलिंग' में प्रयुक्त है और 'पीरित:' शब्द 'नपुंसकलिंग' में विभक्त रूप में है। यहाँ 'अस्ति' क्रिया से सिद्ध होता है कि यह एक साधारण वाक्य है।
'युंहं' शब्द पुँलिंग विभक्तियों का अनुसरण करता है।
मैं तुमसे हमेशा पाँच साल बड़ा रहूँगा। (संयुक्त वाक्य में बदलिए।)
अपनी बात चटपट कहो और अपनी राह लो। (रचना की दृष्टि से वाक्य-भेद लिखिए।)
जैसे ही हँसी साठवें की जगह आठवीं लिखा वैसे ही सब नंबर गायब! (रचना की दृष्टि से वाक्य-भेद लिखिए।)
मेरे दरजे में आओगे, तो दोपहर पसीना आ जाएगा। (सरल वाक्य में रूपांतरित कीजिए।)
सफल खिलाड़ी का कोई निशाना खाली नहीं जाता। (मिश्र वाक्य में बदलिए।)